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दूसरा पहलू: पहरेदारों की गुहार सुनो नहरों की पुकार

Thu, 29 Jan 2026 07:59 AM IST
पवन पांडेय नवीन सिंह पटेल

सार

हरियाणा में नहरी पानी की सुरक्षा में डटे पहरेदारों की मुहिम ‘सुनो नहरों की पुकार’ नहरों को साफ रखने की नई उम्मीद जगाती है। नहरों से निकलीं प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां श्रीगोविंद धाम, गातौली भेजी जाती हैं, जहां इनके चूरे से मंदिर के लिए ईंटें बनाई जाती हैं। आज इस मिशन से 300 से अधिक चर्चित लोग जुड़ चुके हैं। इनके प्रयासों से अब लोग नहरों में मूर्तियां, सिंदूर, चुनरी, फूल, प्लास्टिक की थैलियां आदि नहीं फेंकते हैं।
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दूसरा पहलू -पहरेदारों की गुहार सुनो नहरों की पुकार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पीने के गंदे पानी से मध्य प्रदेश में हुईं मौतों से कोहराम के बीच हरियाणा में नहरी पानी की सुरक्षा में डटे पहरेदारों की कोशिश नई उम्मीद जगाती है। इनकी एक ही गुहार है-‘सुनो नहरों की पुकार’, यानी नहरों को गंदा मत करो। कारण यही कि सूबे के 40 फीसदी इलाके में सिंचाई और पीने का पानी इन्हीं नहरों से मिलता है।
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‘सुनो नहरों की पुकार’ मिशन की शुरुआत रोहतक के ऑल इंडिया जाट हीरोज मेमोरियल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. जसमेर सिंह ने चार वर्ष पहले की थी। वह बताते हैं कि जवाहरलाल नेहरू नहर और भालौठ सब ब्रांच (बीएसबी) का पानी हमारी जीवनरेखा है। इनसे हरियाणा के रोहतक, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और नारनौल से लेकर राजस्थान तक पानी पहुंचता है। लोग इनमें मूर्तियां, सिंदूर, चुनरी, फूल, प्लास्टिक की थैलियां और न जाने क्या-क्या फेंक देते हैं। यही देखकर नहरी पानी बचाने की ठानी। कुछ दिन अकेले जुटे, पर कहां-कहां सुरक्षा करते, कचरा हटाते? सो, डॉ. जसमेर ने सोशल मीडिया पर नहरों का दर्द साझा किया।

इससे यह कारवां चर्चित साइकिलिस्ट मुकेश और धावक रणवीर मलिक जैसे 300 से अधिक लोगों तक पहुंच चुका है। नहर की पटरी पर कुछ घंटे रोजाना देकर ये लोग गंदगी फेंकने वालों को रोकते हैं और बताते हैं कि ये नहरें हैं, नाली नहीं। ये अब तक नहरों से हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और पंजाबी में लिखीं 70 श्रीमद्भगवद्गीता निकाल चुके हैं। शिवपुराण और हनुमान चालीसा तो हजारों में हैं। नहरों से निकलीं प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां जींद जिले के श्रीगोविंद धाम, गातौली भेजी जाती हैं, जहां इनके चूरे से मंदिर के लिए ईंटें बनाई जाती हैं। यह टीम जान देने पहुंचे 100 से ज्यादा लोगों को भी बचा चुकी है।
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डॉ. जसमेर बताते हैं, 2023 में ग्रीन ट्रिब्यूनल की निगरानी समिति के अध्यक्ष प्रीतम पाल बीएसबी देखकर बोले-गंदे नाले में क्यों ले आए?

उन्होंने हरियाणा सरकार और नगर निगम को नोटिस थमाया, तो पुलिस चौकी बना दी गई। साल भर संस्थाएं चौकन्ना रहीं। अब चौकी भी खत्म। नहरों में गंदगी डालने पर पांच साल तक की सजा के प्रावधान भी फाइलों में दाखिल-दफ्तर हैं। दिल्ली में यमुना पुलों की तरह नहरी पुलों में जाली की मांग भी अनसुनी ही है। सेवानिवृत्त चीफ ड्राफ्ट्समैन ईश्वर सिंह कहते हैं कि शुरू में लोग नहरों में ही विसर्जन की जिद करते थे। वह उन्हें समझाते कि शास्त्रों ने नदियों को मां का दर्जा दिया है। हम इनके पानी को जीवंत ईश्वर मानते हैं। इसमें पूजा सामग्री न फेंकें। हमें दे दें, तो गंगाजल छिड़ककर भूविसर्जन करा देंगे। धीरे-धीरे भरोसा बढ़ा है, और अब लोग इन्हें पटरी पर छोड़ने लगे हैं। ....ऐसे दृश्य पहरेदारों को पूजा-सा सुकून देते हैं।
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