प्रशासन पानी की समस्या के प्रति गंभीर तो है लेकिन संसाधनों का अभाव एक बड़ी चुनौती है।
- फोटो : अनुज द्विवेदी
नगर पंचायत मानिकपुर के हर वॉर्ड में पानी के लिए हाहाकार
चित्रकूट धाम मंडल जल संस्थान के रवैया से नगर पंचायत के समस्त 12 वार्डो में पेयजल आपूर्ति का भारी संकट है, लेकिन विभागीय अधिकारियों के कानों में अभी तक जू नहीं रेंगी। इस भीषण गर्मी में नगरवासी बूंद-बूंद पानी को मोहताज हो रहे हैं।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि सरैया व आसपास के क्षेत्रों में मौजूद 15 ट्यूबबेलों से मानिकपुर की सप्लाई होती है। लेकिन कर्मचारियों कमी के चलते नगरवासियों को पीने का पानी मयस्सर नहीं है। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी बताते हैं कि मानिकपुर जल संस्थान के पास जितनी भी 100 एचपी की मोटरें हैं सभी की हालत जर्जर है जिस भी मोटर को चलाया जाता है, वह खराब हो जाती है। औसतन एक मोटर 24 घंटे में तीन बार तकनीकी खराबी से बंद हो जाती है। विभाग में यदि पाइप लाइन लीकेज हो जाए या ज्वाइंट खुल जाए तो एक ज्वाइंट,लेड,लेडूल, व नट बोल्ट तक नहीं है। इसके पूर्व सप्लायर द्वारा विभाग को समय से सामान की आपूर्ति हो जाती रही थी, लेकिन वर्षो से सप्लाई नहीं दी गई है।
पम्प ऑपरेटर्स को प्रतिदिन 80 रुपये की दर से माह में कुल 2400 मजदूरी ठेकेदार द्वारा दी जाती है, जिसके चलते ऐसे लोग पम्प हाउस में काम करते हैं जिनको कोई जानकारी नहीं है। जबकि पम्प ऑपरेटरों को कम से कम आईटीआई की शिक्षा प्राप्त होना चाहिए। इसी तरह लाइन मैन को एक सौ बीस रुपये दिहाड़ी का भुगतान मिलने से कोई लाइन मैन काम करने को तैयार नहीं है।
इसी तरह जल संस्थान के पास मौजूदा समय मे कुल तीन रेगुलर कर्मचारी हैं और वे भी बूढ़े हो चले हैं।यही वजह है कि एक बड़े एरिया में पानी की समस्या दूर नहीं हो पा रही। वहीं मोटरों के स्टार्टर इतने जर्जर हो चुके हैं कि यदि कोई ऑपरेटर हाथ से स्टार्ट करे तो मौत को मुंह लगाना होगा, इसलिए लाठी डंडों के सहारे स्टार्ट किया जाता है।
सूत्रों की मानें तो विभाग जिस ठेकेदार को रखे हुए है वह जान बूझकर कर्मचारी नहीं रखता और हर माह फर्जी हाजिरी दिखाकर लाखों रुपए की चोरी करता है। इस भीषण गर्मी में नगर के किसी भी मोहल्ले गांधी नगर,जवाहर नगर,आर्य नगर,पटेल नगर,सुभाष नगर,शास्त्री नगर, शिव नगर,इंद्रा नगर,गोविंद नगर,वाल्मिकी नगर पूर्वी व वाल्मिकी नगर नगर पश्चमी समस्त वार्डो में पेयजल की भारी समस्या है।
जल संस्थान 20-25 मिनट की कभी-कभार सप्लाई दे रहे हैं जबकि पर्याप्त पानी के भंडारण की व्यवस्था है। लेकिन लूट खसूट के चलते जान बूझकर समस्या बनाई गई है। जब तक कोई दूसरा ठेकेदार नियुक्त नहीं होगा पेयजल समस्या का निस्तारण नहीं हो सकता। विभाग के लोगों को नगर के उपभोक्ताओं द्वारा प्रतिदिन भद्दी-भद्दी गालियां सुननी पड़ती है। कर्मचारियों से बात करने पर वह खुद बताने लगते हैं कि जब न तो कोई बजट है और न ही कोई सामान तो कैसे समस्याओं का निस्तारण होगा।
नगर पंचायत द्वारा जल संस्थान को नगरवासियों की समस्या को देखते हुए हैण्डपम्प मरम्मत के लिए पाइप, चेन व अन्य उपकरण के साथ दो कर्मचारी दिए गए हैं उसी के सहारे विभाग छोटी-मोटी समस्या का निस्तारण करता है। विभागीय लोगों का कहना है कि पानी के लिए जल विभाग के सहारे न रहें बल्कि खुद ही पेयजल की व्यवस्था करें क्योंकि विभाग के पास कोई संसाधन नहीं है।
बुंदेलखंड के कई गांवों में सूखे की मार दिखाई देने लगी है।
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बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण
विकास खंड मानिकपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत गढ़चपा के मजरा ककरेहली में दशकों से गर्मी शुरू होते ही पानी का घोर संकट खड़ा हो जाता है। लोगों को गांव के एकमात्र कुएं का दूषित कीचड़ युक्त पानी पीकर अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है। इससे ग्रामीणों में गंभीर बीमारियों की संभावनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। लोग दशकों से शुद्ध पेयजल मुहैया कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस है।
छोटे से बड़े मिलाकर एक हजार की आबादी वाले इस मजरे में केवल तीन हैण्डपम्प व एक कुआं है, जिसका पानी भी लगभग सूखने के कगार पर है। कुएं से कीचड़युक्त पानी निकल रहा है। जल स्तर नीचे चले जाने से दो हैण्डपम्प जवाब देने की कगार में पहुंच गए हैं। केवल एक हैण्डपम्प कुछ पानी दे रहा है जिससे गांव के लोगों की जरूरतें पूरी नहीं हो पाती,इस वजह से कुंए के कीचड़युक्त दूषित पानी से प्यास बुझानी पड़ रही है।
गांव के शिवप्रकाश, ललित, अवधेश,पप्पू, रोहित, प्रेमचंद्र, बोराकी,बुक्कू सहित अन्य दूसरे गांववासी कहते हैं- यहां वर्षों से गांव में पेयजल समस्या के स्थाई समाधान की मांग की जा रही है और अधिकारियों से गुहार लगाई जा रही है लेकिन केवल आश्वासन मिल रहा है बल्कि ठोस काम नहीं हो रहा।
ग्रामीणों ने स्थाई समाधान होने तक पेयजल के लिए गांव में टैंकर से पानी की आपूर्ति कराने की मांग की लेकिन इस पर भी प्रशासन का ध्यान नहीं गया। सबसे बुरी दुर्दशा मवेशियों की है, इन्हें पानी की तलाश में गांव से बाहर दूरदराज तक भटकना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से शीघ्रातिशीघ्र गांव में स्थाई पेयजल व्यवस्था न होने तक टैंकर से पानी पहुंचाने की मांग की है। मनिकपुर-गढ़चपा ग्राम पंचायत के मजरा ककरेहली में दो वर्ष पूर्व बिछाई गई पाइपलाइन केवल शो पीस साबित हो रही हैं क्योंकि यह आज तक चालू नहीं हुई है।
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