वर्ष 2023-24 के बजट को वित्तमंत्री ने समृद्ध एवं समावेशी भारत की परिकल्पना करते हुए “विकास के सभी क्षेत्रों और नागरिकों, विशेषकर युवाओं, महिलाओं, किसानों, अन्य पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों” तक पहुंचने की उम्मीद जताई है। वर्ष 2023-24 के बजट को वित्तमंत्री ने तीन आर्थिक एजेंडों, चार मौकों और सात प्राथमिकताओं या सप्तऋषियों वाला “अमृतकाल का पहला बजट” बताया है। इस बजट में सप्तऋषियों द्वारा दलितों को मिले मार्गदर्शन का गंभीरता से आकलन किया जाना चाहिए।
पिछले वर्ष के बजट अनुमानों में अनुसूचित जातियों के लिए कुल 142342 करोड़ रुपये आबंटित किए गए थे, जिन्हें संशोधित अनुमानों में बढ़ाकर 152604 करोड़ रुपये कर दिया गया। वर्ष 2023-24 के बजट दस्तावेज और आंकड़ें बताते हैं कि अनुसूचित जातियों के आवंटन में वर्ष 2022-23 के मुकाबले करीब 3% कम राशि आवंटित की गई है।
न्याय एवं अधिकारिता विभाग के जिम्मे काम
अनुसूचित जातियों के विकास और संबंधित नीतियों, कार्यक्रमों और उनके क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार का सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग जिम्मेदार है। इसलिए, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और विभाग का बजट अनुसूचित जातियों के विकास के प्रयासों के तौर पर देखा जाना चाहिए। वर्ष 2023-24 के बजट अनुमानों में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को उसकी मांग संख्या 93 के अंतर्गत कुल 10160.94 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह देश के कुल बजट का मात्र 0.23% तथा अनुसूचित जातियों के बजट का मात्र 6.39% है।
ज्ञातव्य है कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के बजट में अनुसूचित जातियों के अलावा अन्य पिछड़े वर्गों, सामाजिक तौर पर अशक्त वर्गों जैसे ट्रांसजेंडेर, भिखारियों एवं नाशमुक्ति के अलावा दिव्यंगजनों का बजट भी शामिल है। आर्थिक तौर पर कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) का बजट भी इसी मंत्रालय की देखरेख में आता है। इस तरह मंत्रालय की कुल बजट राशि 10160.40 करोड़ रुपये में अनुसूचित जातियों के अलावा अन्य वंचित वर्गों की राशि भी शामिल है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के बजट में पिछले साल के बजट के मुकाबले कुल 6.87% वृद्धि की गई है, जो देश के बजट में औसतन 14.14% की वृद्धि के मुकाबले काफी कम है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने वर्ष 2023-24 में अनुसूचित जातियों हेतु कुल 26 मदों में 9409.14 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जोकि मंत्रालय के कुल बजट का 90% से अधिक है। बजट में अनुसूचित जातियों से संबंधित अनेकों मदों में आवंटन राशि की वृद्धि की गई है।
बजट में वृद्धि
अनुसूचित जातियों के बजट में पिछले साल के मुकाबले प्रमुख बजट वृद्धि में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के बजट में 5 करोड़, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग में 1 करोड़, अनुसूचित जाति हेतु टॉप-क्लास एजुकेशन में 3, अनुसूचित जाति हेतु ओवरसीज छात्रवृति में 14, टार्गेटेड क्षेत्रों में अनुसूचित जाति के हाई स्कूल के बच्चों के आवासीय शिक्षा (श्रेष्ठ)) में 15.56, प्रधानमंत्री दक्षता और कुशलता सम्पन्न हितग्राही (पीएम दक्ष) योजना में 8.47, नेशनल एक्शन फॉर मेकेनाइज़्ड सेनीटेशन ईकोसिस्टम (नमस्ते) में 97.41, बाबासाहेब डॉ. बी.आर.अम्बेडकर फाउंडेशन में 30, पोस्ट-मेट्रिक छात्रवृति में 699.14, तथा प्रधानमंत्री अनुसूचित जातिअभ्युदय योजना में 100 करोड़ रुपये की वृद्धि शामिल हैं।
जबकि अनुसूचित जातियों के बजट में पिछले साल के मुकाबले प्रमुख बजट कटौतियों में राष्ट्रीय छात्रवृति में 10, वंचित इकाई और समूहों की आर्थिक सहायता (विश्वास) योजना में 80, अनु.जाति एवं ओबीसी के लिए वेंचर कैपिटल फंड में 18, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम में 35, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त विकास निगम में 15, छात्र एवं छात्राओं हेतु छात्रावास 30, अस्वच्छ व सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले धंधों में लगे अभिभावकों के बच्चों के लिए प्री-मेट्रिक छात्रवृति में 25, नागरिक अधिकार सुरक्षा कानून 1955 एवं अनु.जाति/जनजाति अत्याचार निवारण कानून 1989 को लागू करने वाली मशीनरी को मजबूत करने की मद में 100 तथा राज्य अनु.जाति विकास निगम को आजीविका की मद में 24 करोड़ रुपये की कटौती शामिल है।
इन वृद्धि और कटौतियों के अलावा अनुसूचित जाति एवं ओबीसी विद्यार्थियों की निशुल्क कोचिंग, अनुसूचित जाति एवं अन्य हेतु प्री-मेट्रिक छात्रवृति तथा डॉ.बी.आर.अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर के बजट को उनके पिछले साल के स्तर पर ही क्रमश: 47,500 और 25 करोड़ रुपये रखा गया है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के अलावा 39 अन्य विभागों ने अनुसूचित जातियों के लिए बजट आवंटित किया है। देश के 102 विभागों में से 62 विभागों ने अनुसूचित जातियों के विकास हेतु कोई राशि आवंटित नहीं की है। इससे इन विभागों की अनुसूचित जातियों के विकास कार्यक्रमों प्रति उदासीनता का पता चलता है। इस उदासीन दृष्टि “सबका साथ, सबका विकास और सबके विश्वास” और देश में समावेशी समृद्धता का आधार कैसे बनेगा?
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