2019 में दिल्ली में प्रदूषण तेजी से बढ़ा।
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स्वच्छ हवा तो चाहिए मगर वनवरण के बिना कैसे?
सन् 1988 की वन नीति के अनुसार देश के पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने के लिए पहाड़ी क्षेत्रों में कुल क्षेत्रफल का दो तिहाई और मैदानी क्षेत्र में एक मिहाई वनावरण होना चाहिए, लेकिन अब तक देश का वनावरण 21.67 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है।
चिन्ता का विषय तो यह है कि उत्तर पूर्वी राज्यों में वनावरण तेजी से घट रहा है जबकि जैव विविधता की दृष्टि से इसे विश्व का एक हाॅट स्पाॅट माना जाता है। देश की अबोहवा को सही बनाए रखने के लिए कार्बन डाइआक्साइड जैसी गैसों को सोखने के लिए घने वन आवश्यक हैं। भारतीय वनों की कुल वार्षिक कार्बन स्टॉक में वृद्धि 21.3 मिलियन टन है, जोकि लगभग 78.1 मिलियन टन कार्बन डाईआक्साइड के बराबर है।
कार्बन सिंक एक प्राकृतिक या कृत्रिम भंडार है जो कि वातावरण से अनिश्चित अवधि के लिए कुछ मात्रा में कार्बनयुक्त रासायनिक अवयवों का भंडारण करता है। यह भण्डारण वनारोपण, कार्बन कैप्चर एंड स्टोरेज से किया जाता है।
राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत ग्रीन इंडिया मिशन, 2030 तक 10 मिलियन हेक्टेयर वृक्ष लगाने की योजना का कार्यान्वयन चल रहा है। लेकिन इतने कम बजट से यह लक्ष्य पूरा हो सकेगा, इसमें संदेह है।
ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन और ग्लोबल वार्मिंग की वैश्विक समस्या से निपटने के लिए 2015 में भारत सरकार ने आइआइटी कानपुर के साथ मिलकर राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक शुरू किया था। 2019 में, भारत ने 2024 तक 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी के अस्थायी लक्ष्य के साथ ‘‘द नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम’’ की शुरुआत की। यह कार्यक्रम उन 102 शहरों के लिये है जहां वायु गुणवत्ता सबसे खराब है।
प्रदूषण को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ी है
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हिमालयी राज्यों को नहीं मिला ग्रीन बोनस
इस वर्ष के बजट में उत्तराखण्ड सहित 12 हिमालयी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए कुछ अलग प्रावधानों की उम्मीद भी की जा रही थी जो कि पूरी नहीं हुई। गत् वर्ष 28 एवं 29 जुलाई को मसूरी में हिमालयी राज्यों के सम्मेलन में हिमालयी राज्यों ने एक कॉमन एजेंडा तैयार कर केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपा था जिसमें इन राज्यों ने पर्यावरणीय सेवाओं के लिए ग्रीन बोनस की मांग की थी और कहा था कि हिमालयी राज्य देश के जल स्तम्भ हैं। इसलिए नदियों के संरक्षण और उन्हें पुनर्जीवित करने के लिए केन्द्र की योजनाओं में हिमालयी राज्यों को वित्तीय सहयोग दिया जाना चाहिए। साथ ही नए पर्यटक स्थलों को विकसित करने में केन्द्र सरकार से सहयोग की मांग की गई।
हिमालयी राज्य के प्रतिनिधियों ने कहा कि देश की सुरक्षा को देखते हुए पलायन रोकने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही हिमालय क्षेत्र के लिए अलग मंत्रालय के गठन का भी सुझाव दिया गया। इस सम्मेलन में वित्त मंत्री सीतारमण के अलावा नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार भी मैजूद थे और दोनों ने हिमालयी राज्यों की ग्रीन बोनस की मांग को जायज माना था।
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