रोजगार देने वाले कृषिक्षेत्र को इस आम बजट से कई बड़ी उम्मीदें थी।
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किसानों को दिया है तोहफा लेकिन?
देश की जीडीपी में लगभग 17 प्रतिशत मेहनतकशों को रोजगार देने वाले कृषिक्षेत्र को इस आम बजट से कई बड़ी उम्मीदें थी। कम एमएसपी, मॉनसून की मार, कर्ज के बोझ और बाजार ने किसानों की इनकम दोगुनी करने के रास्ते को बहुत संकरा कर दिया है। ऐसे में गांव और किसान की चिन्ता भी बजट में साफ तौर पर दिखती है। मोदी सरकार ने किसानों के खाते में सीधे 6 हजार रुपये हर साल डालने की घोषणा की है। इसका फायदा उन किसानों को मिलेगा जिनकी जमीन 2 हेक्टेयर से कम है।
विपक्ष क्यों ले रहा है निशाने पर?
इस बजट में विपक्ष किसानों को दी जाने वाली सहायता राशि की घोषणा को ऊंट के मुंह में जीरा बता रहा है। सहायता राशि भले ही कम हो, लेकिन इस तरह की ठोस पहल पूर्व में नहीं हुई है। किसानों के लिए और बेहतर किया जा सकता था। ग्रामीण रोजगार पर ध्यान देते हुए मनरेगा के लिए 60 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। गौमाता के लिए कामधेनु योजना और राष्ट्रीय गोकुलु आयोग बनाने की घोषणा भी बजट में की गई है। बजट में किसानों के साथ-साथ मजदूरों और श्रमिकों के लिए तोहफों का पिटारा खोल दिया है।
बजट में मोदी सरकार ने तोहफों की बौछार के बावजूद कई सेल्फ गोल भी किए हैं। मोदी सरकार ने ग्रामीण भारत में व्याप्त असंतोष और समस्याओं को स्वीकार तो किया है, लेकिन बजट में की गई घोषणाएं अपर्याप्त हैं। वहीं युवाओं के आगे मुंहबाए खड़ी बेरोजगारी की समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम बजट नहीं किया गया है। गरीबों को 10 प्रतिशत आरक्षण तो दिया, लेकिन अपने चुनावी वादे के अनुसार युवाओं को नौकरिया देने में मोदी सरकार असफल रही है। अंतरिम बजट में रोजगार की बात को लेकर कोई साफ तस्वीर पेश नहीं की गई है।
मोदी सरकार का यह बजट-किसान, गांव, गरीब पर फोकस है, जिसे देर आए, दुरुस्त आए कहा जा सकता है। मोदी सरकार ने इस बजट के माध्यम से अपनी कॉर्पोरेट-मित्र छवि से उबरने की कोशिश तो है ही, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी संजीवनी देने की बड़ी कोशिश है। सरकार ने आखिर महसूस कर लिया कि किसान, गरीब और गांव की हालत सुधारे बगैर अर्थव्यवस्था को सुधारा नहीं जा सकता है।
व्यापारी वर्ग को मनाने की कोशिश
नोटबंदी और जीएसटी के बाद से ही उद्योग जगत और विशेषकर व्यापारी वर्ग मोदी सरकार से नाराज चल रहा है। जीएसटी को लेकर व्यापारी वर्ग में नाराजगी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। व्यापारी वर्ग को मोदी सरकार के आखिरी बजट से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन बजट में अर्थव्यवस्था के सभी वर्गों को सुविधाएं दी गई है लेकिन व्यापारी वर्ग को पूरी तरह नकार दिया गया है। व्यापारी देश की अर्थव्यवस्था में रीड की हड्डी का काम करते हैं। बजट को देख कर लगता है कि व्यापारी वर्ग की मांगों और परेशानियों की ओर से मोदी सरकार ने मुंह फेर लिया है। व्यापारी वर्ग की अनदेखी चुनावी वर्ष में मोदी सरकार को भारी पड़ सकती है।
इसमें कोई दो राय नहीं है कि पिछले साढे़ चार सालों में मोदी सरकार ने लगभग हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किए हैं। इस दौरान केंद्र सरकार ने आर्थिक क्षेत्र में कई सुधारों की शुरुआत की। इनमें गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी), इन्सॉल्वेंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी), कई क्षेत्रों में विदेशी निवेश से जुड़े सुधार, जन-धन योजना और आधार-बैंक को जोड़ने वाला सब्सिडी सुधार कार्यक्रम प्रमुख हैं।
हालांकि, ऐसे बहुत से क्षेत्र हैं जिनमें मोदी सरकार कोई अहम सुधार करने में नाकाम रही है। इसकी एक मिसाल है- जमीन और श्रम सुधार। ये उन लोगों के लिए सबसे बड़ी बाधा हैं, जो भारत में उद्योग लगाना चाहते हैं। जीएसटी और नोटबंदी को लेकर मोदी सरकार की जमकर आलोचना की, लेकिन ये कठोर कदम आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगे ये बात धीरे-धीरे व्यापक तौर पर देश की जनता समझने लगी है।
क्या विजनरी है मोदी सरकार का बजट
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कितनी सफल रही है सरकार?
भ्रष्टाचार और आर्थिक घोटालों पर मोदी सरकार की ‘जीरो टाॅलरेंस’ नीति काबिलेतारीफ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की खास बात ये है कि सरकार के मंत्री भ्रष्टाचार से दूर रहे हैं, जिस तरह पिछली सरकार 2-जी स्कैम, कोयला स्कैम, कॉमनवेल्थ स्कैम, चॉपर स्कैम, आदर्श स्कैम के आरोपों में घिरी रही, उससे उलट मोदी सरकार में भ्रष्टाचार के मामले कम आए।
हालांकि राज्य सरकारों पर घोटालों के आरोप लगे। पिछले काफी समय से कांग्रेस मोदी सरकार की छवि पर दाग लगाने के लिए राफेल विमान खरीद में गड़बड़ी के आरोप ‘बिना पक्के सुबूतों’ के लगा रही है। भ्रष्टाचार कम होन से अर्थव्यस्था को गति व बल मिला है, इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में जन-धन योजना की घोषणा स्वतंत्रता दिवस के मौके पर की थी। इस योजना का मकसद देश के हर नागरिक को बैंकिंग सुविधा से जोड़ना है और इन योजना के तहत 31.31 करोड़ लोगों को फायदा भी मिला है। बताया जाता है कि आर्थिक जगत के क्षेत्र में ये दुनिया की सबसे बड़ी योजना है। मोदी सरकार ने पिछले साढे़ चार सालों में डिजिटाइजेशन पर काफी जोर दिया है। अब बैंकिंग क्षेत्र से लेकर अन्य सरकारी कार्यों में डिजिटाइजेशन को बढ़ावा मिला है, जिससे लोगों को काफी राहत मिली है।
पिछले साढे़ चार के कार्यकाल में मोदी सरकार द्वारा चलाई गई आयुष्मान भारत-राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण मिशन, सोलर चरखा मिशन, राष्ट्रीय पोषण मिशन, एंटी नारकोटिक्स योजना, गोबर-धन योजना, हरित क्रांति-कृषोन्नति योजना, समग्र शिक्षा योजना, अटल भूजल योजना, पहला “खेलो इंडिया स्कूल गेम्स”, राष्ट्रीय बांस मिशन, एमएसएमई के लिए 59 मिनट में एक करोड़ रुपये का ऋण, दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना, प्रधानमंत्री ‘मेक इन इंडिया’, स्वच्छ भारत अभियान, उज्जवला योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना और मिशन इंद्रधनुष की सफलता ने देश की दशा और दिशा बदलने का काम किया है।
तो क्या विजनरी है मोदी सरकार का बजट?
यह बजट मोदी के नए भारत के विजन को दर्शाता है। चुनावी वर्ष में पेश बजट का चुनावी बजट कहा जाना कोई नई बात नहीं है। लेकिन मोदी सरकार ने 2030 में 10 सर्वाधिक महत्वपूर्ण आयामों को सूचीबद्ध करते हुए अगले दशक के लिए अपनी परिकल्पना पेश की है। वित्तमंत्री ने कहाकि, हम एक ऐसे भारत का निर्माण करेंगे जहां गरीबी, कुपोषण, गंदगी और निरक्षरता बीते समय की बातें होगी।
उन्होंने कहा कि भारत एक आधुनिक, प्रौद्योगिक से संचालित, उच्च विकास के साथ एक समान और पारदर्शी समाज होगा। अगर ये परिकल्पना जमीन पर उतर पाएं तो आने वाले समय में भारत दुनिया के अग्रणी देशों में शुमार होगा। मोदी सरकार द्वारा पेश अंतरिम बजट ‘न्यू इंडिया’ के सपनों वाला चुनावी बजट है। गांवों, किसानों, मध्यम वर्ग और श्रमिकों की तरक्की पर जोर साफ दिख रहा है।
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