जिस बोडोलैंड में कभी बंदूकों की फसल लहलहाती थी, विस्फोटों से धरती कांपती थी, बारूदी गंध में लिपटे शवों से आदमीयत कराहती थी, उसी बोडोलैंड में अब ज्ञान की ज्योति जग रही है, नॉलेज फेस्टीवल हो रहे हैं, साहित्यक सम्मेलन हो रहे हैं, कविताओं का पाठ हो रहा है और पूर्वोत्तर स्तर से लेकर एशिया स्तर तक के खेलकूदों का आयोजन हो रहा है। डर की जगह उत्साह, माहौल ले रहा है। युवा पीढ़ी सृजन की नई राह तलाश रही है।
बीटीआर प्रमुख का मानना है कि विकास के लिए मानसिकता का बदलना जरूरी है। नाकारात्मकता से सकारात्मकता की तरफ जाना होगा। उनकी सरकार बनने के बाद उन्होंने हर समुदाय को साथ लेने की कोशिश की है। उनके साथ संवाद किया और उनकी समस्याओं को जानने का प्रयास किया। उसका प्रभाव सरकार की नीतियों में देखा जा सकता है। वे लोगों बोडोलैंड में बसे हर समुदाय के कल्याण और विकास के लिए काम कर रहे हैं, ताकि सब मिलकर बोडोलैंड को नया बोडोलैड बनाने में मदद करें।
बीटीआर सरकार के प्रयासों से ही आदिवासी उग्रवादी संगठन मुख्यधारा में शामिल हुए हैं। गोर्खा समुदाय के बीच भी कुछ लोग हिंसा पर उतारू थे, उन्हें भी मुख्यधारा में लाया गया है, क्योंकि बोडोलैंड के विकास के लिए स्थायी शांति जरूरी है। इस दिशा में पुलिस और प्रशासन का सहयोग भी मिल रहा है।
वे बताते हैं कि माहौल को बदलने के लिए उनकी सरकार ने कुछ रचनात्मक पहल की है।
पहली बार कविता उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें एक सौ भाषा की कविताओं का पाठ किया गया। इसका मूल स्वर था- प्रेम और शांति के लिए कविता। पूरे देश से लोग आए। उन्होंने बोडोलैंड को करीब से देखा। इसके साथ बोडोलैंड विश्वविद्यालय की मदद से नॉलेज उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें 14 देशों के करीब 200 वक्ताओं और सात विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भाग लिया।
इसमें हमने उनसे बहुत कुछ सीखा। उस सम्मेलन में नॉबल विजेता प्राप्त मोहम्मद यूनुस ने भाग लिया। बोडोलैंड में इसी वर्ष साहित्य उत्सव का आयोजन किया गया। देशभर के साहित्यकार आए। बोड़ो साहित्य सभा ने देश की अन्य भाषाओं के साहित्यकारों को बोड़ो भाषा की भूमि पर अन्य भाषाओं और बोड़ो भाषा के बीच जीवंत संवाद कराया।