हमारी सतर्कता हमें ब्लैक फंगस से लड़ने में बहुत मददगार साबित होगी
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क्यों है भारत के सामने चुनौतियां
विशेषज्ञों ने ब्लैक फंगस को लेकर चेताया है कि प्रतिरोध क्षमता कम और शुगर लेवल ज्यादा होने, हैवी स्टेरॉइड लेने तथा हफ्ते भर आईसीयू में रहकर इलाज करवाकर लौटे मरीजों को इससे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। सीडीसी ने यह स्पष्ट किया है कि म्यूकरमाइकोसिस कोई संक्रामक नहीं है। इसका सीधा-सा मतलब यह है कि यह एक इंसान से दूसरे इंसान के संपर्क में आने से नहीं फैलता है।
आज हम देख पा रहे हैं कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों में मृत्यु 1 से 2 फीसदी के बीच पाई जा रही है। कोरोना वायरस को हराने में हमारा मजबूत इम्यूनिटी बहुत मददगार है। ऐसे में बताया जा रहा है कि मजबूत इम्यूनिटी के साथ ब्लैक फंगस को बड़ी आसानी के साथ हराया जा सकता है। मजबूत इम्यूनिटी का मतलब हमारी बीमारियों से लड़ने की क्षमता से है। लेकिन इससे भी जरूरी यह है कि हमें ब्लैक फंगस के लक्षणों को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।
म्यूकरमाइकोसिस यानि ब्लैक फंगस के लक्षणों में मुख्यत: आंख व नाक के आसपास दर्द, लालिमा व सूजन के साथ बुखार और सिरदर्द रहता है। खांसी और हांफना, खून की उल्टी, साइनोसाइटिस यानि नाक बंद होना या नाक से काले म्यूकस का डिस्चार्ज होना, दांत ढीले हो जाना या जबड़े में दिक्कत महसूस होना और नेक्रोसिस यानि किसी अंग का गलना तथा त्वचा पर चकत्ते का पड़ना इत्यादि लक्षण शामिल हैं।
ऐसे में हमारी सतर्कता हमें ब्लैक फंगस से लड़ने में बहुत मददगार साबित होगी। मगर ध्यान देने योग्य है कि नाक बंद होने के सभी मामलों को बैक्टीरियल इंफेक्शन न समझें विशेष रूप से कोरोना मरीजों में। सबसे जरूरी यह है कि डॉक्टर की सलाह लेने और इलाज शुरू करने में बिलकुल भी देरी न करें। यदि धूल वाली जगह पर जाएं, तो मास्क का प्रयोग जरूर करें। म्यूकरमाइकोसिस मरीज के साइनस के साथ आंख, दिमाग, फेंफड़ों या त्वचा पर भी हमला कर सकता है। यदि समय रहते इसे नियंत्रित नहीं किया गया तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
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