जनादेश 2024 के लिए भारतीय जनता पार्टी का फर्स्ट लुक या टीजर (घोषणा पत्र) जारी हो चुका है। इंडियन पॉलिटिकल लीग (आईपीएल) में सत्ता के क्रीज पर नाबाद पारी खेल रहे बड़े सियासी खिलाड़ी नरेंद्र मोदी ने नवरात्र के छठे दिन या यूं कहें पहले चरण के मतदान (सियासी मैच) से ठीक छह दिन पहले सिक्सर लगाकर मैच का रोमांच बढ़ा दिया है। चुनावी शो में भले अब तक कोई शोरशराबा नहीं और न ही कोई रोमांच नजर आ रहा है लेकिन इस पटकथा में विवाद के साथ-साथ संवाद है, वहीं सियासी शो के लिए लाइट, कैमरा और एक्शन भी।
भाजपा के घोषणा पत्र में समान नागरिक संहिता और एक देश, एक चुनाव के राग से जहां विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है, वहीं मतदाताओं के सबसे बड़े वर्ग (गरीब, युवा, महिला, बुजुर्ग, किसान) का ख्याल कर उनसे सीधे संवाद की स्थिति पैदा करने की कोशिश की गई है। 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए 5 लाख तक का मुफ्त इलाज का वादा मास्टर स्ट्रोक है।
बुजुर्ग बोझ नहीं। राम रथ खींचकर नरेंद्र मोदी को सत्ता के शीर्ष तक पहुंचाने वाले लालकृष्ण आडवाणी की अनदेखी को लेकर राम मंदिर निर्माण वर्ष में भले मोदी सवालों में घिरे लेकिन भारत रत्न से नवाजकर न केवल उन्होंने मार्गदर्शक के सम्मान का सीधा संदेश दिया बल्कि सवाल उठाने वालों की बोलती तक बंद कर दी।
अब फिर से मोदी सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए चुनावी समर में हैं। 70 साल से अधिक उम्र वाले हर वर्ग के बुजुर्गों के 5 लाख तक के मुफ्त इलाज के वादे के जरिए मोदी ने न केवल बुजुर्ग मतदाताओं को साधा है, बल्कि उन लाखों परिवारों तक पहुंच बनाने की कोशिश की है, जिन परिवारों में बुजुर्ग हैं और बीमारी की वजह से समूचा घर-परिवार परेशानी से घिरा रहता है।
युवाओं के लिए निवेश से नौकरी तक का वादा कर मुद्रा योजना के तहत कर्ज सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख करना युवाओं और हुनरमंदों के लिए प्रोत्साहन है, वहीं महिलाओं के लिए तीन करोड़ और लखपति दीदी, ड्रोन पायलट का वादा भी मायने रखता। गरीबों के लिए अगले पांच साल तक मुफ्त खाद्यान्न का वादा भले पुराना है लेकिन 80 करोड़ से अधिक परिवारों के लिए अगले पांच साल तक मुफ्त राशन की योजना की गारंटी मायने रखती है। गरीबों को पीएम आवास में और तेजी लाने का वादा भी अहम है।
कोरोना की आपदा में मुफ्त वैक्सीन के बाद अब सर्वाइकिल कैंसर से मुक्ति मुहिम भी जख्मों पर मरहम लगाने वाली साबित हो सकती है। किसानों पर करम, बिजली बिल शून्य, रेहड़ी-पटरी वालों और गांवों तक वित्तीय मदद के वादे के जरिए विकास संदेश भी सियासी जमीन पर वोटों की फसल लहलहाने में कारगर साबित हो सकती है, क्योंकि रोटी, कपड़ा और मकान के साथ-साथ इलाज जैसी सहूलियतों का वादा हर वर्ग के मतदाताओं के दिलों और जरूरतों को छूता है।
लाइट, कैमरा और एक्शन
ऐसे में गगनयान गौरव की बात हो या हर भारतीय की सुरक्षा का भरोसा, हरित ऊर्जा से रोजगार पैदा करने का वादा हो या दुनिया में सेमी कंडक्टर हब बनाने की उम्मीद, डिजिटल क्रांति से स्किल, स्केल और स्कोप की आस भी भाजपा के वादे में उम्मीदों की किरणें (लाइट) हैं। कैमरा है- विकास और विरासत की तस्वीर पिरोने को। जनजातीय गौरव से पर्यटन के अवसर बढ़ाने तक का रोडमैप हो या तमिल भाषा के साथ-साथ बुलेट ट्रेन की रफ्तार के माध्यम से पूरब हो या पश्चिम, उत्तर हो या दक्षिण सभी को जोड़कर 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य के साथ-साथ सत्ता के हैट्रिक की ओर मजबूती से कदम बढ़ाए गए हैं।
भाजपा के संकल्प में युवा हो या बुजुर्ग, महिला हो या किसान, गरीब हो या अमीर सभी को साधने के लिए संकल्प से सिद्धि की ओर कदम है। विकास है तो विरासत भी। भाजपा के वादे की पोटली में जहां विवाद है, संवाद है, लाइट है, कैमरा है, वहीं एक्शन भी। अगली सरकार के 100 दिन के काम का एक्शन प्लान। साथ ही मजबूत इरादे-भ्रष्टाचारियों पर प्रहार के।
पिक्चर अभी बाकी है
जनादेश 2024 का टीजर जारी हो चुका है। विवाद, संवाद, लाइट, कैमरा, एक्शन के बाद अब यह देखना दिलचस्प रहेगा कि 4 जून को जब लोकतंत्र का जनादेश (चुनाव नतीजे) रिलीज होता है तो बॉक्स ऑफिर पर चार सौ सीटें ( 4 सौ करोड़ का बिजनेस) पाती हैं या नहीं। बकौल मोदी- यह तो ट्रेलर है..... पिक्चर अभी बाकी है। ऐसे में आपकी तरह हमें भी है 4 जून का इंतजार।
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