पहले अपने-अपने कामों में व्यस्त होने के कारण मैं भी बुलबुल या रॉबिन जैसे हमारे घर या बालकनी को अपना घर समझने वाले शहरी पक्षियों को नजरअंदाज कर देती थीं
- फोटो : हर्षदा कुलकर्णी
आज कल मेरी बालकनी जैसे मुझे किसी जंगल की याद दिलाती है। कभी छोटा बसंत (कॉपरस्मिथ बार्बेट) अपनी टक-टक से सुस्त दोपहर को संगीतमय करता है तो कभी किंगफिशर अपनी किलकिल से पूरा परिसर गुंजित कर देता है।
मैंने घर बैठे न जाने कितना वक्त नन्ही मुनिया को हरी घास की पट्टी लेकर उड़ते हुए देखने में या सनबर्ड को घोंंसले के लिए मकड़ी के जाले जमा करते देखने में व्यतीत किया है और एक पक्षी है जिसे देखकर मेरा दिल मानों खुशी से उछल पड़ता है।
जो अपनी चक-चक की आवाज से मन में उमंग भर देता है वह है नाचन या चकदील, यह एक बड़ी ही चंचल चिड़िया है जब भी आती है अपने सिटकारी वाले गाने और पंखे जैसी पूंछ के साथ नाच से दिल खुश कर देती है।
मुझे याद है वह एक बरसाती दिन। बारिश की बूूंदों ने हमारे घर के पीछे वाली कॉन्क्रीट फर्श पर एक छिछले गड्ढे में पानी भर दिया था जो कि वैसे तो बड़ा ही खराब दृश्य होता है, पर नाचन ने ये होने न दिया।
जैसे ही बारिश रुकी मुझे सुनाई दी वही चक-चक की चिरपरिचित आवाज और जब मैंने उस आवाज का उगम ढूंढा तो मुझे मिली खुशी से अपनी पूंछ उठाकर फुदकती नाचती गड्ढे में अपने पंख गीले करती हुई नाचन जिस पर बारिश के बाद नहाए हुए सूरज की छोटी से किरण अपना पीला रंग मल रही थी। ऐसे अद्भुत दृश्य के बाद भला कौन अपने आंगन को जंगल से कम आंके।
जितना आनंद मुझे जंगली रास्तोंं पर भटकते हुए पक्षी देखने में मिलता है उतना ही आनंद उतनी ही सुकून और शांति का अनुभव मुझे बालकनी बर्डिंग ने भी दिया है। यह तो जाहिर-सी बात है कि इस परेशानी भरे समय में जब सारा जग ही परिस्थिति से जूझ रहा है तब हमें सब से ज्यादा जरूरत है अपने मन का संतुलन बनाए रखने की।
इस पेंडेमिक ने मुझे पक्षियों के बारे में बहुत कुछ सिखाया है और पक्षियों ने नई सुबहों के बारे में। किसी ने सही ही तो कहा है आशा एक पंखोंवाला पक्षी है। मुझे लगता है बालकनी बर्डिंग जैसी आसान चीज ने मुझे उन्ही आशा के पक्षियों से मिलवाया है। अगर आप को भी इन तकलीफों से बाहर निकलकर कुछ रंगबिरंगी उड़ती आशांएं देखनी हो तो बस दूरबीन उठाइए, बालकनी में जाइए या खिड़की खोल दीजिए।
लेखिका हर्षदा कुलकर्णी पक्षी प्रेमी तथा एक स्वयं-शिक्षित पक्षी निरीक्षक हैं। खुद एक वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर होने के साथ-साथ वह प्रकृति विषयक ब्लॉग तथा कविता लेखन में भी रुचि रखती हैं।
यह श्रंखला 'नेचर कन्ज़र्वेशन फाउंडेशन (NCF)' द्वारा चालित 'नेचर कम्युनिकेशन्स' कार्यक्रम की एक पहल है। इस का उद्देश्य भारतीय भाषाओं में प्रकृति से सम्बंधित लेखन को प्रोत्साहित करना है। यदि आप प्रकृति या पक्षियों के बारे में लिखने में रुचि रखते हैं तो ncf-india से संपर्क करें।
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