देश के सरकारी अस्पतालों और जन-स्वास्थ्य केन्द्रों में बायोसिमिलर दवाओं के उपयोग की जरूरत
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पेटेन्ट के रिन्यूवल का खेल समझिए
इस संबंध में एक समस्या यह है कि बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां जिनके पास दवाइयों के पेटेन्ट हैं, और जिनके आधार पर वे भारी मुनाफा कमाते हैं, उनका प्रयत्न होता है कि वें अपने पेटेन्ट को दवा के निर्माण में छोटी-मोटी तब्दीली करके रिन्यू करा लें, जिसे पेटेन्ट की एवरग्रीनिंग कहा जाता है। हमारी कोशिश यह रहती है कि पुराने पेटेन्ट को रिन्यू करने के लिए जब तक कोई नई दवा या उसमें कोई विशेष सुधार न हो, नए पेटेन्ट की अनुमति नहीं दी जाए।
इसके फलस्वरूप कई बार इन कंपनियों द्वारा पेटेन्ट कानून के अर्न्तगत कानूनी दावपेंच भी आजमाये जाते हैं। इसके लिए यह भी जरूरी है कि इस बारे में पेटेन्ट के रिन्यूवल के मामलों में कड़ी दृष्टि रखी जाए। साथ ही देश के पेटेन्ट के कानून और ड्रग कन्ट्रोलर इत्यादि रेगूलेटरी संस्थाओं द्वारा नियमों की सख्त अनुपालना की जाए।
इस समय देश में बायोसिमिलर दवाओं के अधिक प्रचलन को बढ़ाने के लिए अस्पतालों में इलाज और जन औषधी के कार्यक्रमों, जैसे आयुष्मान भारत इत्यादि में अधिक प्रयोग की आवश्कता है। इसका एक लाभ जो यह होगा कि सरकार को इन कार्यक्रमों में मंहगी बायोलोजिक दवाओं के स्थान पर, उतनी ही प्रभावशाली परन्तु किफायती बायोसिमिलर दवाओं के ज्यादा प्रयोग से होने वाली बचत को जन-स्वास्थ्य के अन्य कार्यकलापों में लगाया जा सकता है।
इसके अलावा इनकी बढ़ती हुई मांग के कारण देश में इनका निर्माण बढ़ाया जा सकता है जिसके फलस्वरूप इन दवाईयों की कीमत में और कमी होगी।
लोगों तक इसकी सहज उपलब्धता जरूरी
कुल मिलाकर इन दवाओं को देश के सरकारी अस्पतालों और जन-स्वास्थ्य केन्द्रों में प्रयोग के लिए अनुमति देने की जरूरत है, जिसके लिए इनकी जांच भी कड़ाई से की जानी चाहिए ताकि आम लोगों को इसपर विश्वास बना रहे। सरकार को इस प्रकार की बायोसिमिलर दवाओं के थोक में खरीदने के लिए भी कदम उठाने के लिए जरूरत है ताकि देश मे इनका उत्पादन बढ़ सके और इनका निर्यात भी हो सके।
देश की कानूनी प्रणाली जो पेटेन्ट और ड्रग कन्ट्रोल इत्यादि को देखती है को सुदृढ़ करने की जरूरत है। कम्पटीशन कमीशन द्वारा भी यह देखा जा सकता है कि कम्पटीशन कानून के अर्न्तगत बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा कम्पटीशन कानून की सख्ती से अनुपालना की जाये।
यदि सारांश में कहा जाए, आज आवश्यकता है कि सरकार द्वारा उठाए गए अनेक प्रभावी कार्यक्रमों जैसे आयुष्मान भारत आदि के अतिरिक्त, इनके अर्न्तगत अस्पतालों में दवाइयों के खर्च में बचत के लिए बायोसिमिलर दवाओं का उत्पादन ओर प्रचलन बढ़ाया जाए ताकि इससे आम आदमी को इलाज के बढ़ते हुए खर्च में राहत मिल सके।
नोट: लेखक भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के पूर्व अध्यक्ष हैं।
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