पिछले लोकसभा चुनाव में महागठबंधन के साथ रहे राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेकुलर फ्रंट नाम से 6 दलों का एक नया मोर्चा बनाया है। इस मोर्चे में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, एआईएमआईएम, बसपा, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक और जनतांत्रिक पार्टी सोशलिस्ट शामिल है।
मोर्चा का संयोजक पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव को बनाया गया है। एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने उपेंद्र कुशवाहा को अपने मोर्चे की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है।
पूर्व सांसद व जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के अध्यक्ष पप्पू यादव ने प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन (पीडीए) बनाया है, जिसमें एमके फैजी की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया, उत्तर प्रदेश के चंद्रशेखर आजाद रावण की आजाद समाज पार्टी शामिल है। इस मोर्चे की तरफ से पप्पू यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है।
रामविलास पासवान के देहांत के बाद उनके पुत्र चिराग पासवान लोजपा के सर्वे सर्वा नेता हैं। उन्होंने चुनाव में नीतीश कुमार के खिलाफ ताल ठोक रखी है और उनकी आलोचना का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। उन्होंने एनडीए गठबंधन में शामिल जनता दल यू के सभी उम्मीदवारों के खिलाफ अपनी पार्टी के प्रत्याशियों को चुनाव लड़वाने की घोषणा की है।
भाजपा व जदयू में टिकट से वंचित रहे नेताओं को चिराग पासवान लोजपा में शामिल कर अपनी पार्टी का प्रत्याशी बना रहे हैं। चिराग खुले आम कह रहे हैं कि मैं आज भी एनडीए में शामिल हूं। मेरी लड़ाई भाजपा से नहीं नीतीश कुमार के जदयू से है।
बिहार में विधानसभा का चुनाव बहुत ही रोचक स्थिति में पहुंच गया है। एनडीए की तरफ से नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि एनडीए दो तिहाई से अधिक सीटों पर चुनाव जीतेगा। एनडीए गठबंधन में शामिल दलों को कितनी भी सीटें मिले अगला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही बनेंगे।
महागठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार लालू यादव के छोटे पुत्र तेजस्वी यादव को बनाया गया है। उनके नेतृत्व में कांग्रेस सहित सभी वामपंथी दल चुनाव लड़ रहे हैं। महागठबंधन के नेता बनने के बावजूद तेजस्वी यादव को चुनावी प्रबंधन का अनुभव नहीं है। पिछले विधानसभा चुनाव में महागठबंधन लालू प्रसाद यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ा था। उस वक्त जनता दल (यूनाईटेड) भी महागठबंधन में शामिल था। इस कारण महागठबंधन को दो तिहाई सीटों पर जीत मिली थी।
अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के फिर से एनडीए में शामिल हो गए है। लालू प्रसाद यादव जेल में हैं। इस कारण मुकाबला तेजस्वी यादव बनाम नीतीश कुमार में हो गया है। नीतीश कुमार की पढ़े-लिखे, अनुभवी व साफ छवि के मुकाबले कम पढ़े-लिखे तेजस्वी यादव ज्यादा प्रभावी नहीं नजर आ रहे हैं। महागठबंधन में शामिल कांग्रेस में भी कोई ऐसा नेता नहीं है, जो नीतीश कुमार के मुकाबले कहीं ठहरता हो। वामपंथी दल तो लालू प्रसाद यादव के उदय के बाद से ही बिहार में अप्रासंगिक होते चले गए। भाकपा, माकपा ने तो महागठबंधन के भरोसे ही अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं। भाकपा माले का जरुर कुछ विधानसभा क्षेत्रों में असर है।
बिहार में 2015 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 24.42 फीसदी वोट और 53 सीटें, कांग्रेस को 6.66 फीसदी वोट और 27 सीटें, जेडीयू को 16.83 फीसदी वोट और 71 सीटें, आरजेडी को 18.35 फीसदी वोट और 81 सीटें, एलजेपी को 4.86 फीसदी वोट और 2 सीटें, हम को 2.27 फीसदी वोट और एक सीट, आरएलएसपी को 2.56 फीसदी वोट और 2 सीटें मिली थी। वही सीपीआई माले को 1.54 फीसदी वोट और तीन सीटें मिली थी। उस वक्त भाकपा को 1.36 फीसदी वोट, माकपा को 0.61 फीसदी वोट, एनसीपी को 0.49 फीसदी वोट मिले थे। मगर इन तीनो ही दलों के सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी।
बिहार विधान सभा चुनाव में इस बार हर कोई मुख्यमंत्री पद की दावेदारी जता रहा है। नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान के बाद अब पप्पू यादव भी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बन गए हैं। विधानसभा चुनाव में इस बार प्राय सभी पार्टियां गठबंधन में शामिल होकर चुनाव लड़ रही हैं। इसलिए चुनाव में असली परीक्षा तो गठबंधनो की होगी।
विधानसभा चुनावों के दौरान सीटों पर बात नहीं बनने पर कई दलों के नेताओं ने अपने पुराने साथी बदल लिए हैं। ऐसे मे अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या ये गठबंधन चुनाव परिणाम के बाद भी कायम रहेगें या पिछली बार की तरह नए राजनीतिक समीकरण बनेगें। इस बात का पता तो चुनाव परिणाम के बाद ही चल पाएगा।