पृथ्वी के इतिहास की सबसे बड़ी बाढ़ जिब्राल्टर और सिसिली से होकर गुजरी और कुछ ही वर्षों में इसने पूरे भूमध्य सागर को भर दिया। जिब्राल्टर जलडमरूमध्य के किनारे खोदाई में मिले पानी के नीचे की एक घाटी के बारे में अनुमान है कि यह विशाल बाढ़ के कारण बनी होगी। एक खोज में शोधकर्ताओं को समुद्र तल के नीचे नमक की विशाल परत मिली, जिससे इस बात की पुष्टि हुई कि लगभग 60 लाख साल पहले एक बड़ा पर्यावरणीय परिवर्तन हुआ था।
करीब 50 लाख वर्ष पूर्व अटलांटिक महासागर का पानी मौजूदा जिब्राल्टर जलडमरूमध्य से होकर बहता था। इस सिद्धांत के अनुसार, समुद्री पानी एक किलोमीटर ऊंची ढलान से खाली भूमध्यसागर की ओर तेज रफ्तार कार से भी तेजी से बहता था और रास्ते में एक गगनचुंबी इमारत जितनी गहरी खाई खोदता था। उस समय, भूमध्यसागर काफी हद तक सूखी और नमकीन घाटी था, लेकिन इसमें इतना पानी भरा कि यह कुछ वर्षों-शायद कुछ महीनों में ही भर गया।
विज्ञापन
यह थीसिस हमने 2009 में जिब्राल्टर जलडमरूमध्य के किनारे खोदाई में मिले पानी के नीचे की एक घाटी के अध्ययन में रखी थी, जिसके बारे में अनुमान लगाया गया कि यह विशाल बाढ़ के कारण बनी होगी। यदि यह सही है, तो जैनक्लीन नाम की यह कथित बाढ़ पृथ्वी की अब तक की सबसे बड़ी बाढ़ होगी। हमारा नया शोध जैनक्लीन युग की अवसादी चट्टानों की जांच पर केंद्रित है, जो दर्शाता है कि कैसे पानी आधुनिक सिसिली और मुख्य भूमि अफ्रीका के बीच की खाई से होकर भूमध्य सागर के पूर्वी आधे हिस्से को फिर से भरने के लिए आगे बढ़ा।
दरअसल, 19वीं सदी के अंत में भूमध्य सागर के आसपास नमक से भरपूर चट्टानों का अध्ययन करने वाले भूवैज्ञानिकों को एहसास हुआ कि लगभग 50 से 60 लाख वर्ष पहले कुछ असामान्य हुआ था: समुद्र सूख गया था। उन्होंने उस युग को ‘मेसिनियन’ नाम दिया। 1970 के दशक में, वैज्ञानिकों ने पहली बार भूमध्य सागर के नीचे मेसिनियन युग की तलछटी चट्टानों में गहरी खोदाई की।
विज्ञापन
एक खोज में उन्हें समुद्र तल के नीचे नमक की विशाल परत मिली, जिससे इस बात की पुष्टि हुई कि लगभग 60 लाख साल पहले एक बड़ा पर्यावरणीय परिवर्तन हुआ था। फिर 2009 में जिब्राल्टर के माध्यम से प्रस्तावित अफ्रीका-यूरोप सुरंग के भू-भौतिकीय आंकड़ों से पता चला कि अटलांटिक महासागर और भूमध्य सागर के बीच विशाल पानी के नीचे की खाई अचानक और प्रलयकारी बाढ़ के कारण बनी होगी।
हमारा नवीनतम शोध इसका समर्थन करता है। हमने उस क्षेत्र का पता लगाया, जिसे सिसिली के नाम से जाना जाता है। हमारी टीम ने सिसिली का दौरा कर पाया कि पहाड़ियां वाकई असामान्य थीं। यदि सिसिली में स्थित उन पहाड़ियों और गर्तों का निर्माण भी किसी विशाल बाढ़ के कारण हुआ है, तो गर्तों के आधार से कटा हुआ चट्टानी मलबा 50 लाख वर्ष से भी अधिक समय बाद पहाड़ियों के शीर्ष पर मिलना चाहिए। निश्चित रूप से, हमें पहाड़ियों की चोटी पर टेढ़े-मेढ़े पत्थर के मलबे मिले।