राहुल गांधी जी की भारत जोड़ो यात्रा जब से शुरू हुई है तब से ही यह चर्चा का विषय बनी हुई है। भारतीय जनता पार्टी में बेचैनी है और नित्य कोई न कोई आलोचना का कारण ढूंढती रहती है। इधर, कुछ राजनीतिक दल भारत जोड़ो यात्रा को कांग्रेस जोड़ो यात्रा बताते हैं तो कुछ इसे कहते हैं कि यह पूरे देश में क्यों नहीं हो रही है? जाहिर है वास्तविक कारण कोई नहीं समझ पा रहा है कि यह यात्रा क्यों और किस मकसद से प्रारंभ हुई है।
जाहिर है जिस प्रकार से दक्षिणपंथी शक्तियां अधिकांश देशों में हावी हो रही हैं प्रसिद्ध दार्शनिक प्लेटो का कथन याद आ रहा है जिन्होंने अपनी किताब (द रिपब्लिक) में आज से 2400 वर्ष पहले लिखा था। यह किताब ग्रीक भाषा में लिखी गई है।
उन्होंने लिखा है- लोगों की सरकार फैसले लेने में उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा है कि किसी नेता के लिए मतदान करना उन्हें काफी जोखिमभरा लगता है क्योंकि उनके मुताबिक मतदाता उम्मीदवार की प्रसांगिक बातों, उनके व्यक्तित्व और भाषण से प्रभावित हो सकता है चाहे उस व्यक्ति में सरकार चलाने की योग्यता ना हो।
उनके इस कथन से प्रभावित होकर उनके गुरु सुकरात ने कहा लोकतंत्र अराजकता का सुखद रूप है। कालांतर में आपने विश्व का इतिहास देखा कि किस प्रकार दो बार नेताओं के प्रभाव में विश्व के लगभग सभी देशों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से विश्व युद्ध कूदना पड़ा और उसका कितना भयावह परिणाम हुआ यह सबके सामने है।
इन विषम परिस्थितियों में राहुल गांधी जी इस यात्रा के माध्यम से भारत को यह संदेश देना चाहते हैं कि देश में रहने वाला प्रत्येक नागरिक समान रूप से देखा जाए। अल्पमत में रहने वालों को हेय दृष्टि से ना देखा जाए। हमारा हिंदू धर्म विशाल है जिसका कोई अंत ही नहीं है।
यह वह धर्म है जिसका कोई एक नियम, संगठन या संस्थापक नहीं है, जिसका कोई एक ग्रंथ नहीं है। अनेकों ग्रंथ हैं जिसे विशाल ज्ञान का भंडार भरा पड़ा है। हमें अपने पूर्वजों पर गर्व है। आदि शंकराचार्य पर गर्व है जिन्होंने इस धर्म का प्रचार प्रसार कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से उड़ीसा तक पूरे देश में किया। उन्हे बारंबार प्रणाम है।
उनकी यह बात विश्वास करने योग्य है।भारत एक सैकड़ों धार्मिक स्थलों से बंधा हुआ देश है।
भारत एक लोकतंत्र देश है और जब यह देश आजाद हो रहा था तो उस समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने कहा था-यह एक सांस्कृतिक इकाई है जिसका एक समान इतिहास, साहित्य और सभ्यता है। अभी तक जो भी हिदुत्व के बारे में जानकारी प्राप्त हुई है। मैं अपने आपको उसका उत्तराधिकारी मानता हूं जो मुझे उस समय में ले जाता है। मैं इस बात से पूरी तरह से सहमत हूं कि जो मेरे दोस्त, हमारे हिंदू साथी को मेरे जैसे हिंदुत्व की आवश्यकता नहीं लगती और अब वह विदेश में रहते हैं और भारतीय नहीं है, मुझे उनसे कोई गुरेज नहीं है। लेकिन मैं इस भौगोलिक और सांस्कृतिक हिंदुत्व में बहुत संतुष्ट हूं जो मुझे मेरे पूर्वजों के अतीत से जोड़ता है।) परंतु हमारे हिंदुत्व ने कभी भी किसी धर्म का विरोध नहीं किया।
आज दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि बात कुछ हद तक सही दिखती लग रही है। राहुल जी की यात्रा का मुख्य उद्देश्य यह है कि विश्व के लोग भारत को भाजपा सरकार के कारनामों से हिंदुओं और भारत से मत घृणा करें। हमारा देश विविधता से भरा है और हम सभी धर्मो का समान रूप से आदर करते हैं। हमारा प्रत्येक नागरिक भारतीय है चाहे वह किसी भी धर्म का हो और उसका समान अधिकार है। इसलिए विश्व में रहने वाले सभी भाई प्रत्येक भारतीय को जो वहा का नागरिक है उसे हिंदू समझकर तिरस्कृत ना करें।स्वतंत्रता के बाद भारत की सत्ता दुष्टों बदमाशों और लुटेरों के हाथ में चली जाएगी।
हमें इससे निराश होने की आवश्यकता नहीं हमको अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की बात को याद करना चाहिए जिन्होंने लिखा था जनतंत्र जनता का जनता के द्वारा जनता के लिए शासन है।
हमारी जनता बहुत समझदार है और उसने कई बार लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में अपनी समझदारी का भरपूर परिचय दिया है और किसी भी सरकार का अत्याचार नाइंसाफी बर्दाश्त नहीं किया समय आने पर वह उसका फैसला अवश्य करेगी राहुल जी की यात्रा केवल यही सद्भावना यात्रा है।
यह देश सब का है और देश नफरत से नहीं प्रेम के बल पर चलेगा इस संदेश को कश्मीर से कन्याकुमारी तक राहुल जी अपनी पदयात्रा से जनता को पहुंचा रहे हैं लोग उनका स्वागत कर रहे हैं और मुझे पूर्ण विश्वास है जनता समय आने पर इसका जवाब देश में नफरत फैलाने वालों को अवश्य देगी ही और उनका यह प्रेम भरा संदेश विदेशों में भी हिंदुओ और भारतीयों के प्रति बढ़ती नफरत को *प्रेम* में बदलेगा।
(लेखक ओंकार नाथ सिंह, मीडिया एवं कम्युनिकेशन एडवाइजरी कमेटी, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के सदस्य हैं)