सन 1972 में सिंचाई विभाग द्वारा इस बांध को बनाने के लिए 50 मज़दूरों से 10 दिनों तक पेड़ों की कटाई का कार्य कराया गया ।
- फोटो : amar ujala
इस नदी का पानी बरदहा नदी में टिप्पुरी बाबा (कल्यानपुर ग्राम पंचायत) नामक स्थान पर मिलता है और रानीपुर गिदुरहा, सकरौंहा, चमरौहां में भीषण तबाही मचाता है । बरसात में यह गांव महीनों संपर्क से कटे रहते हैं । बांध बन जाने से यहां बाढ़ की समस्या से निजात मिलेगी । वही दूसरी ओर चौंरी के जंगल मे पानी भर जाने से दस्यु समस्या भी समाप्त होगी । बांध का पानी नहर के माध्यम से राजापुर , बरगढ़, कर्वी तथा जिले के हर गांव तक बाणसागर परियोजना जैसे ले जाया जा सकता है ।
करौंहा ग्राम पंचायत अन्तर्गत पूर्व माध्यमिक विद्यालय करौहा में कार्यरत प्रधानाध्यापक कुंजबिहारी तिवारी ने बताया कि इस क्षेत्र में पानी की समस्या को दृष्टिगत रखते हुए इस क्षेत्र में बांध बनाने के संसाधन मौजूद हैं । जो कि दस्यु समस्या होने की वजह से प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है ।
सन 1972 में सिंचाई विभाग द्वारा इस बांध को बनाने के लिए 50 मज़दूरों से 10 दिनों तक पेड़ों की कटाई का कार्य कराया गया । जिसमें महावीर कोल, राममनोहर ,ददोली निवासी करौंहा के आदि कुछ मजदूर आज जीवित हैं और उस समय की दास्तां बताते हैं। बाद में यह योजना बन्द करके पाठा रिसॉर्ट डैम के नाम से 1972-76 बरदहा डैम बनाया गया जो यहां से पांच किमी पश्चिम पर्वत के बाहर की ओर है । जबकि इस डैम में इतना जलभराव नही होता है । बरदहा नदी यही से शुरू होती है ।
खास बात ये है कि जब भी बांध बनाये जाते हैं उसमें सैकड़ो गांव डूब जाते हैं और अरबों रुपये का मुआवजा दिया जाता है जैसा कि बाणसागर परियोजना में 300 गांव डूब गए और लाखों लोग विस्थापित हुए और अरबों रुपये मुआवजा दिया गया । जबकि इस बांध के निर्माण में एक भी घर नही डूबता है । कोई भी खेतिहर जमीन नहीं है जिसका मुआवजा देना हो । केवल वन भूमि है । तो फिर सरकार को इस ओर क्यों नही ध्यान देना चाहिए ।
इससे पाठा की तस्वीर बदल जाएगी और जिले में पेयजल संकट दूर हो जायेगा । पूरे जिले के लगभग पांच सैकड़ा गांव में पेयजल समस्या पूरी तरह दूर हो जाएगी । इस सम्बंध में ग्राम प्रधान करौंहा तुलसीदास ,ग्राम प्रधान जारोमाफी के महिपाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि बांध बन जाने से यह क्षेत्र पंजाब और हरियाणा की तरह खुशहाल हो जायेगा । हमारा सरकार से अनुरोध है कि इस सम्बंध में समुचित कार्यवाही की जाए । वहीं ,जिला पंचायत सदस्य छोटेलाल द्वारा बताया गया कि मैंने पूर्व में प्रभारी मंत्री महेंद्र सिंह को इस बारे में अवगत कराया था लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई । मैं मुख्यमन्त्री से अनुरोध करता हूं की इस बांध का सर्वे कराकर इसे बनवाया जाए जिससे इस क्षेत्र को मुख्य धारा में लाया जा सके ।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण ): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।