जिन क्षेत्रों को प्रमुख प्रतिनिधित्व मिला
सरकार में सबसे अधिक लाभान्वित क्षेत्र उत्तर बंगाल और जंगलमहल माने जा रहे हैं। उत्तर बंगाल के कूचबिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी और दार्जिलिंग को उल्लेखनीय प्रतिनिधित्व मिला है।
वहीं जंगलमहल के पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम और पश्चिम मेदिनीपुर भी सत्ता संरचना में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रहे हैं। इसके अलावा दक्षिण बंगाल में कोलकाता और उत्तर 24 परगना को भी पर्याप्त महत्व मिला है।
यदि 42 लोकसभा सीटों के आधार पर राजनीतिक विश्लेषण किया जाए तो बैरकपुर, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, पुरुलिया, बांकुड़ा, मेदिनीपुर, कोलकाता उत्तर और कोलकाता दक्षिण सबसे अधिक लाभान्वित सीटों के रूप में सामने आती हैं।
जिन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व सीमित रहा
दूसरी ओर, कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं जिन्हें प्रतिनिधित्व के मामले में अपेक्षाकृत कम महत्व मिला है। इनमें मुर्शिदाबाद, मालदा, दक्षिण दिनाजपुर, हावड़ा, बीरभूम तथा दक्षिण 24 परगना का बड़ा हिस्सा शामिल है।
लोकसभा सीटों के संदर्भ में देखें तो मालदा उत्तर, मालदा दक्षिण, मुर्शिदाबाद, जंगीपुर, उलुबेड़िया, श्रीरामपुर, डायमंड हार्बर, रायगंज और बालुरघाट जैसी सीटों का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कमजोर या सीमित माना जा सकता है।
कुल मिलाकर, भाजपा सरकार की सत्ता संरचना में उत्तर बंगाल और जंगलमहल का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जबकि मालदा-मुर्शिदाबाद बेल्ट और दक्षिण बंगाल के कुछ हिस्से अपेक्षित हिस्सेदारी हासिल नहीं कर सके हैं।
बहरहाल, सरकार की यह संरचना भाजपा के उन क्षेत्रों को प्राथमिकता देने का संकेत देती है जहां पार्टी ने पिछले वर्षों में सबसे तेज़ राजनीतिक विस्तार किया है और जहां उसका संगठनात्मक आधार सबसे मजबूत माना जाता है।
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