वैज्ञानिक मानते हैं कि स्थानीय मौसम में बदलाव पत्तियों के सूखने, रंग बदलने या पेड़ से टूटकर गिरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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आख़िर क्यों रंग बदलती हैं पत्तियां?
दरअसल, पत्तियों के रंग बदलने का कारण उनके अंदर ही मौजूद होता है। गर्मी के जाते ही पत्तियों के रंग में बदलाव शुरू हो जाता है। गर्मियों में, पत्ते हरे होते हैं क्योंकि उस समय वे बहुत सारे क्लोरोफिल बना रहे होते हैं। यह पौधों को सूरज की रोशनी से ऊर्जा बनाने में मदद करता है। लेकिन प्रत्येक पत्ती में चार मुख्य वर्णक होते हैं। क्लोरोफिल (हरा), ज़ैंथोफिल्स (पीलापन), कैरोटेनोइड्स (संतरे), एन्थोकायनिन (लाल)। अब जैसे-जैसे दिन छोटे होने लगते हैं, पत्तियां रंग बदलने लगती हैं। क्योंकि सर्दियों की तैयारी के लिए पत्तियां कम क्लोरोफिल का उत्पादन कर रही होती हैं। ठंड के दस्तक देते ही हरे रंग फीके पड़ने लगते हैं और उनमें लाल, संतरे, और पीलापन भरे रंग अधिक दिखाई देने लगते हैं।
वैज्ञानिक मानते हैं कि स्थानीय मौसम में बदलाव पत्तियों के सूखने, रंग बदलने या पेड़ से टूटकर गिरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि ठंडे प्रदेशों में पत्तियों के रंग बदलने की प्रक्रिया ज्यादा स्पष्ट और सुंदर दिखाई देती हैं।
लोग फूलों की घाटियों की जगह रंगीन जंगलों के मनमोहक नज़ारे को देखना ज्यादा पसंद करते हैं।
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रंगीन प्राकृतिक नज़ारों को देखने के लिए भी आते हैं पर्यटक
गर्म प्रदेशों में अमूमन यह नज़ारा कम ही देखने को मिलता है। इसलिए ऐसे प्रदेशों से शैलानी शरद ऋतु के रंगीन मनमोहक नज़ारे को देखने के लिए ठंडें देशों की ओर कूच करते हैं। स्वीडन के पर्यटन में इस मौसम को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। कई शैलानी रंगीन रास्ते और रंगबिरंगे जंगलों को देखने के लिए ख़ासतौर पर सड़क मार्ग से सफ़र करते हैं। ख़ास बात यह है कि सितंबर-अक्टूबर के महीनों में पेड़-पौधों कि पत्तियों का महत्व फूलों से ज्यादा बढ़ जाता है।
लोग फूलों की घाटियों की जगह रंगीन जंगलों के मनमोहक नज़ारे को देखना ज्यादा पसंद करते हैं। इन रंगीन पत्तियों पर कुछ ही महीनों में बर्फ़ की मोटी चादर बिछने लगेगी। साथ ही शुरू हो जाएगा कड़कड़ाती ठंड का लंबा मौसम। इसलिए सितंबर - अक्तूबर का महीना यहां प्राकृतिक रूप से सबसे रंगीन महीना माना जाता है। इसके बाद के महीनों में प्रकृति करवट बदलकर फिर सफ़ेद रंग में लिपटी हुई दिखने लगेगी। ऐसे मनमोहक नज़ारे अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया महादेशों में भी देखने को मिलते हैं।
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