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तेजी से विकास कर रहा बांग्लादेश, भारत से है कई मामलों में आगे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना - फोटो : पीटीआई
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शेख हसीना का भारत दौरा समाप्त हो गया है। नई दिल्ली में शेख हसीना ने बदलते बांग्लादेश की तस्वीर रखी। भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर को बांग्लादेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया। कट्टररपंथी जमात की कमर तोड़ने वाली बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारतीय व्यवस्था को बताया कि 1947 में भारत से अलग अस्तित्व में आए बंगाली मुसलमानों ने अपनी अलग पहचान एशियाई मानचित्र पर बना है, जिसका लोहा चीन से लेकर पश्चिमी देश भी मान रहे है।

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जहां पूरे विश्व में बांग्लादेशी मुसलमानों को अच्छा उद्यमी माना जा रहा है वहीं बांग्लादेश ने अपनी धरती पर भी कई बड़े महत्वपूर्ण परिवर्तन कर दिखाए हैं। बांग्लादेश ने इस्लामिक स्टेट और अलकायदा जैसे संगठनों की ही कमर सिर्फ बांग्लादेश में नहीं तोड़ी, बल्कि आर्थिक विकास की एक बड़ी रेखा खींच दी है।

आज एशियाई निवेश का बड़ा केंद्र बांग्लादेश बन गया है, जहां चीन, जापान, दक्षिण कोरिया के निवेशक ही नहीं पश्चिमी निवेशक भी पहुंच रहे है। भारत में भी बांग्लादेश ने यही संकेत दिया है कि भारत और पूर्वी एशिया के बीच बांग्लादेश एक ब्रिज बनने को तैयार है।

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उतर पूर्व के राज्यों के विकास में बांग्लादेश की भूमिका
भारत के उतर पूर्वी राज्यों के विकास में बांग्लादेश की अब महत्वपूर्ण भूमिका हो गई है। यह इलाका भौगोलिक रूप से भारत से ज्यादा बांग्लादेश के नजदीक है। किसी जमाने मे बांग्लादेश इनके लिए समस्या था, क्योंकि उतर पूर्वी राज्यों में गरीबी और बेरोजगारी के कारण बांग्लादेशी घुसपैठ करते थे। लेकिन अब स्थिति बदल गई।

दरअसल, बांग्लादेश पिछले बीस सालों में आर्थिक ताकत बन गया। अब उतर पूर्वी राज्यों को बांग्लादेशी निवेश की जरूरत है। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि त्रिपुरा ने बांग्लादेशी उद्यमियों को त्रिपुरा मे निवेश के लिए आमंत्रित किया है।

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री विप्लव देव ने कुछ दिन पहले त्रिपुरा में विकसित हो रहे स्पेशल इकनॉमिक जोन में निवेश के लिए बांग्लादेश के उद्यमियों को आमंत्रित किया था। यह खबर चौंकाने वाली थी। एक गरीब मुल्क जो 1971 में भारत के सहयोग से आजाद हुआ वो क्या इतना विकास कर गया है, कि भारत में भी निवेश की क्षमता रखता है? 

दरअसल, उतर पूर्वी राज्यों के लिए सबसे नजदीक का बंदरगाह चिटगांव है। भारत को समुद्री नौवहन के लिए चिटगांव महत्वपूर्ण है। चिटगांव बंदरगाह उतर पूर्वी राज्यों के लिए आयात और निर्यात के लिए महत्वपूर्ण है।

त्रिपुरा से यह महज 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यही नहीं उतर पूर्वी राज्यों को पूरे भारत से जोड़ने में बांग्लादेश महत्वपूर्ण है। अगर आज बांग्लादेश के रास्ते पश्चिम बंगाल और उतर पूर्व के त्रिपुरा, मिजोरम समेत कई राज्यों को जोड़ा जाएगा तो परिवहन खर्च में खासी बचत होगी।

फिलहाल उतर पूर्व से भारत को पश्चिम बंगाल का सिलीगुड़ी कनेक्ट करता है, जो बांग्लादेश की सीमा से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

भारत के लिए बांग्लादेश पूर्वी एशिया जाने का एंट्री प्वाइंट है। - फोटो : फाइल फोटो

बांग्लादेश का आर्थिक विकास भारत के उतर पूर्वी राज्यों के लिए गेम चेंजर
दरअसल,  यह एक सच्चाई है कि बांग्लादेश का विकास उसे एशिया का नया टाइगर बनाने जा रहा है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत के दौरे ने स्पष्ट कर दिया है कि बांग्लादेश को अब एशिया में कोई नजर अंदाज नहीं कर सकता है। इकनॉमिक फोरम दवारा आयोजित इंडिया इकनॉमिक समिट में बतौर चीफ गेस्ट पहुंची शेख हसीना ने भारतीय निवेशकों को बांग्लादेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया।

आज बांग्लादेश में इन्फ्रास्ट्र्क्चर, ऊर्जा समेत कई सेक्टरों में निवेश की भारी संभावनाएं हैं। कई एशियाई मुल्कों के निवेश का बड़ा केंद्र इस समय बांग्लादेश बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी बैठक हुई और दोनों ने क्षेत्रीय विकास में अहम भूमिका निभाने की रूपरेखा तय की।

एशिया में पाकिस्तान का भूगोल पाकिस्तान के जियो-पॉलिटिकल महत्व को बढ़ाता है। बांग्लादेश का भूगोल बांग्लादेश के जियो-पॉलिटिकल महत्व को बढ़ाता है। भारत के लिए अगर पाकिस्तान सेंट्रल एशिया जाने का एंट्री प्वाइंट है तो बांग्लादेश पूर्वी एशिया जाने का एंट्री प्वाइंट है। यही नहीं भारत के उतर पूर्वी राज्यों के नार्दन सीमा चीन से लगता है। वैसे में भारत के लिए बांग्लादेश का स्ट्रैटजिक महत्व और बढ़ जाता है।

किसी भी विपरित परिस्थिति में बांग्लादेश के रास्ते भारतीय सैनिकों का उतर पूर्व में पहुंचना काफी आसान होगा। यही नहीं बांग्लादेश भारत के लिए पूर्वी एशिया के लिए महत्वपूर्ण एग्जिट प्वाइंट है। यही नहीं बांग्लादेशी मध्यवर्ग ने पश्चिम बंगाल की इकनॉमी पर भी असर डाला है। कोलकाता के बाजार बांग्लादेशी पर्यटकों का मुख्य केंद्र है।  


जो पाकिस्तान नहीं कर पाया, उसे बांग्लादेश ने कर दिखाया
पाकिस्तान ने अपने भूगोल का इस्तेमाल ताकतवर मुल्कों से खैरात लेने में किया। ताकतवर देशों के स्ट्रैटजिक हितों को साधने मे किया। जबकि बांग्लादेश ने अपने भूगोल का इस्तेमाल आर्थिक विकास में किया। यही कारण है कि आज बांग्लादेश भारत के लिए महत्वपूर्ण है। भारत को अगर पूर्वी एशिया से आर्थिक रूप से कनेक्ट होना है, तो बांग्लादेश से अच्छे संबंध जरूरी है।

पाकिस्तान से खराब संबंध ने सेंट्रल एशिया से लेकर यूरोप तक में जमीन के रास्ते भारत के प्रवेश को रोक रखा है। वैसे में भारत को छोटे-छोटे विवादित मुद्दों को दरकिनार कर बांग्लादेश से अच्छे संबंध विकसित करना होगा। बांग्लादेश से नदी जल विवाद से लेकर कई और मुद्दों को सौहार्दपूर्ण तरीके से हल करना होगा।

भारत को यह नहीं भूलना चाहिए कि बांग्लादेश इस समय चीन की कंपनियों के निवेश का बड़ा केंद्र है। अबतक चीन बांग्लादेश में 38 अऱब डॉलर के निवेश की घोषणा कर चुका है। चीन बांग्लादेश में इन्फ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, बंदरगाहों के विकास में पैसा लगा रहा है।

भारत स्ट्रैटजिक भूगोल का महत्व समझता है। अगर आज भारत के हाथ में गिलगित बल्तिस्तान (नार्दन एरिया) होता तो  भारत को अफगानिस्तान के लिए ट्रेड रूट की परेशानी नहीं होती। लेकिन ये एरिया भारत के बजाए पाकिस्तान के कब्जे में चला गया। आज भारत को सेंट्रल एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंचने  लिए ईऱान पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

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चीनी कंपनियों तेजी से बांग्लादेश में पैर फैला रही हैं। - फोटो : फाइल फोटो

एनआरसी दिपक्षीय संबंधों में बाधा नहीं बनेगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शेख हसीना की दिल्ली में बातचीत हुई। बैठक में एनआरसी मुद्दा ही नहीं बना, क्योंकि भारतीय पक्ष ने बांग्लादेश को साफ कर दिया है कि यह भारत का आंतरिक मामला है। भारत कोशिश कर रहा है कि एनआरसी से बाहर निकाले गए लोगों को भारत में ही किसी तरीके से एडजस्ट किया जाए।

दरअसल, भारत बांग्लादेश के महत्व को समझता है। भारत- बांग्लादेश के संबंध इमोशनल हैं, क्योंकि बांग्लादेश की आजादी में भारत की अहम भूमिका थी। यह तय है कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्ट्रर से बाहर किए गए लोगों को भारत बांग्लादेस वापस भेजने की योजना नहीं बना रहा है। एनआरसी को लेकर भारत-बांग्लादेश के संबंध खराब नहीं होंगे। खुद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में ढाका में वादा किया है कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्ट्रर भारत का आंतरिक मामला है। इससे बांग्लादेश का कोई लेना-देना नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूयॉर्क में भी बांग्लादेश के प्रधानमंत्री शेख हसीना को बताया कि एनआरसी भारत का आंतरिक मामला है। इसका प्रभाव बांग्लादेश पर नहीं पड़ेगा। वैसे भारत बांग्लादेश के साथ मिलकर क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग को बढ़ाना चाहता है तो भारत एनआरसी को लेकर बांग्लादेश से संबंध खराब नहीं करेगा, क्योंकि भारत का एक्ट ईस्ट पॉलिसी बांग्लादेश के सहयोग के बिना सफल ही नहीं हो सकता है।

क्षेत्रीय विकास के लिए बनाया गया बांग्लादेश-भूटान-इंडिया-नेपाल (बीबीआईएन) फॉरमर के विकास में बांग्लादेश अहम भूमिका निभा रहा है। बांग्लादेश-चीन-इंडिया-म्यांमार (बीसीआईएम) फोरम के विकास में भी बांग्लादेश की अहम भूमिका है। बांग्लादेश बिम्सटेक फोरम में भी सक्रिय है। भारत की पश्चिमी सीमा पर जो क्षेत्रीय सहयोग का काम पाकिस्तान को करना चाहिए था, वो काम इस समय पूर्वी सीमा पर बांग्लादेश कर रहा है।


आर्थिक विकास में कई एशिया देशों को पीछे छोड़े चुका बांग्लादेश
आर्थिक विकास में बांग्लादेश की तेज गति पाकिस्तान को काफी पीछे छोड़ चुकी है। आर्थिक विकास में पाकिस्तान बांग्लादेश से पांच गुणा पीछे हो गया है। जबकि पाकिस्तान क्षेत्रफल में बांग्लादेश से पांच गुणा बड़ा है। यही नहीं बांग्लादेश आर्थिक विकास के आंकड़ों में भारत को टक्कर देने की स्थिति में आ गया है।

बांग्लादेश का ग्रोथ रेट 8 प्रतिशत है। किसी जमाने में 100 प्रतिशत कर्ज और अनुदान के बजट पर निर्भर बांग्लादेश का बजट आज आत्मनिर्भर बजट है। 1974 में भारी अकाल का सामना करने वाला बांग्लादेश आज खादान में आत्मनिर्भर है।

ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स में बांग्लादेश भारत को पीछे छोड़ रहा है। बांग्लादेश की वर्तमान अर्थव्यवस्था 180 अरब डॉलर की है जो 2021 तक 322 अरब डॉलर तक पहुंचेगी। बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय वार्षिक आय 2000 डॉलर पहुंच गई है, जो भारत से थोड़ा ही कम है। बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति औसत उम्र 72 साल है, जबकि भारत में 68 साल है।

डिजिटल लेनदेन में बांग्लादेश ने एशिया के कई मुल्कों को पीछे कर दिया। यहां 34 प्रतिशत लोग डिजिटल लेनदेन कर रहे हैं, जबकि बांग्लादेशियों ने बांग्लादेश के विकास में अहम भूमिका निभाई है, जो  बांग्लादेश में सलाना 15 अरब डॉलर भेज रहे हैं। एशियाई मुल्कों का औसत 27 प्रतिशत है। बांग्लादेश रेडिमेड गारमेंट निर्यात में विश्व में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है।

बांग्लादेश कपड़ों का सलाना निर्यात 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने के करीब है। विदेशों में 25 लाख काम करने वाले बांग्लादेशी बांग्लादेश के विकास में अहम भूमिका निभा रह है। वे बांग्लादेश में सलाना 15 अरब डॉलर विदेशों से कमा कर भेज रहे हैं। 
 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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