रेलवे के ‘कवच ‘ का उद्घाटन पिछले साल हुआ था। दरअसल रेलवे ने अपने पैसेंजर्स की सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए 'कवच' का निर्माण करवाया था।
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आखिर क्या है रेलवे की कवच टेक्नोलॉजी?
‘कवच ‘ के सफल परीक्षण के बाद उसे रेलवे का मास्टर स्ट्रोक और बड़ी क्रांति माना जा रहा था। इस तकनीक में रेलवे वो तकनीक विकसित कर चुका है जिसमें अगर एक ही पटरी पर ट्रेन आमने सामने भी आ जाए तो एक्सीडेंट नहीं होगा। रेल मंत्रालय ने तब बताया था कि इस ‘कवच’ टेक्नोलॉजी को धीरे-धीरे देश के सभी रेलवे ट्रैक और ट्रेनों पर इंस्टॉल कर दिया जाएगा। अब रेलवे के इन्हीं दावों पर सवाल उठ रहे हैं ।
पिछले साल मार्च 2022 में हुए कवच टेक्नोलॉजी के ट्रायल में एक ही पटरी पर दौड़ रही दो ट्रेनों में से एक ट्रेन में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव सवार थे और दूसरी ट्रेन के इंजन में रेलवे बोर्ड के चेयरमैन खुद मौजूद थे। एक ही पटरी पर आमने सामने आ रहे ट्रेन और इंजन ‘कवच’ टेक्नोलॉजी के कारण टकराए नहीं, क्योंकि कवच ने रेल मंत्री की ट्रेन को सामने आ रहे इंजन से 380 मीटर दूर ही रोक दिया और इस तरह परीक्षण सफल रहा।
कामयाब ट्रायल के बाद रेल मंत्री ने कहा था कि अगर एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें आमने सामने हों तो कवच टेक्नोलॉजी ट्रेन की स्पीड कम कर इंजन में ब्रेक लगाती है। इससे दोनों ट्रेनें आपस में टकराने से बच जाएंगी। 2022-23 में कवच टेक्नोलॉजी को 2000 किलोमीटर रेल नेटवर्क पर इस्तेमाल करने का लक्ष्य था, इसके बाद हर साल 4000-5000 किलोमीटर रेलवे नेटवर्क जोड़ने का लक्ष्य था लेकिन इस काम में जिस तेजी की उम्मीद की गई थी शायद उस स्तर पर काम नहीं हो पाया।
कवच टेक्नोलॉजी को देश के तीन वेंडर्स के साथ मिलकर आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन एंड स्टेंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन) ने डेवलप किया था ताकि पटरी पर दौड़ती ट्रेनों की सेफ्टी सुनिश्चित की जा सके। आरडीएसओ ने इसके इस्तेमाल के लिए ट्रेन की स्पीड लिमिट अधिकतम 160 किलोमीटर/घंटा तय की थी। इस सिस्टम में 'कवच' का संपर्क पटरियों के साथ-साथ ट्रेन के इंजन से होता है। पटरियों के साथ इसका एक रिसीवर होता है तो ट्रेन के इंजन के अंदर एक ट्रांसमीटर लगाया जाता है जिससे की ट्रेन की असल लोकेशन पता चलती रहे।
'कवच' की खासियत यह है कि वो उस स्थिति में एक ट्रेन को ऑटोमेटिक रूप से रोक देगा, जैसे ही उसे निर्धारित दूरी के भीतर उसी पटरी पर दूसरी ट्रेन के होने का सिग्नल मिलेगा। इसके साथ-साथ डिजिटल सिस्टम रेड सिग्नल के दौरान 'जंपिंग' या किसी अन्य तकनीकी खराबी की सूचना मिलते ही ‘कवच’ के माध्यम से ट्रेनों के अपने आप रुकने की बात कही गई थी।
पिछले साल कवच के सफल परीक्षण के बावजूद इसको पुरे देश में रेल नेटवर्क पर लागू करना चाहिए था लेकिन रेलवे ने इस पर ठीक से काम नहीं किया। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरे रेलवे सिस्टम को जल्दी ही कवच प्रणाली से लैस करना होगा, साथ ही रेलवे की तकनीकी खामिया दूर करने के लिए ठोस और समयबद्ध प्रयास करने होंगे।
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