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सलमान रुश्दी: भारतीय आजादी का ही नहीं, विश्वविख्यात लेखक का भी अमृत महोत्सव

सार

हम इस कायरतापूर्ण और वहशियाना हमले की निंदा करते हैं और सलमान रुश्दी की जिंदगी की कामना करते हैं। रुश्दी अभी वेंटिलेटर पर हैं। उनके एजेंट के मुताबिक उनके लिवर और एक आंख पर गहरी चोट है।
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लिखना सचमुच अब जोखिम का काम होता जा रहा है। यह विश्वव्यापी भयानक समय है । - फोटो : Social Media
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विस्तार
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सलमान रुश्दी और उनके बुकर पुरस्कार प्राप्त उपन्यास मिडनाइट्स चिल्ड्रन का नायक भारतीय आजादी की तरह आधी रात की संतान है। इसी रूपक के जरिए सलमान रुश्दी अपनी जादुई यथार्थवाद की शैली में भारतीय आजादी का क्रिटीक गढ़ते हैं।

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इस उपन्यास के प्रथम संस्करण में इंदिरा गांधी को जगह जगह अंग्रेजी के कैपिटल अक्षरों में WIDOW लिखा गया था। इंदिरा गांधी ने इसे ब्रिटेन के कोर्ट में चुनौती दी। इंदिरा गांधी ने मुकदमा जीता और फलस्वरूप उपन्यास के अगले संस्करणों से इंदिरा गांधी की आलोचना को हटाया गया।


पिछले कई दशकों से यूरो डॉलर, स्कॉच और स्त्रियों के रसिया सलमान रुश्दी पहले ब्रिटेन और फिर अमेरिका की कड़ी सुरक्षा में रह रहे हैं। कल वे न्यूयॉर्क में एक व्याख्यान देने के लिए गए जिसका शीर्षक था -

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अमेरिका : निर्वासित लेखकों की शरणगाह और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सुरक्षित घर!


व्याख्यान शुरू भी नहीं हुआ था कि इस कथित 'सुरक्षित घर' में एक चौबीस वर्ष के हमलावर ने रुश्दी को चाकुओं से गोद दिया। हमलावर ने रुश्दी को ही लहूलुहान नहीं किया बल्कि उसने उस विषय को भी लहूलुहान कर दिया जिस पर सलमान रुश्दी व्याख्यान देने वाले थे।

इस हमले का संबंध जरूर उनके "सेटेनिक वर्सेस" नामक उपन्यास से निकलेगा, जिसमें वे इस्लाम और मुहम्मद साहब पर टिप्पणियां कर गए थे और उसके बाद से ही वे सलमान रुश्दी अयातुल्ला खुमैनी के फतवे के निशाने पर हैं।

दरअसल, सलमान रुश्दी वी एस नायपॉल की तरह प्रोवोकेटिव राइटिंग के उस्ताद हैं और पिछले बहुत बरसों से नोबेल पुरस्कार का इंतजार करते हुए दिन गुजार रहे हैं। लेकिन नोबेल पुरस्कार से पहले चाकू मिल गया।

हम इस कायरतापूर्ण और वहशियाना हमले की निंदा करते हैं और सलमान रुश्दी की जिंदगी की कामना करते हैं। रुश्दी अभी वेंटिलेटर पर हैं। उनके एजेंट के मुताबिक उनके लिवर और एक आंख पर गहरी चोट है। इस घटना ने फिर साबित कर दिया कि सुरक्षा (Security) एक मिथ है। आती हुई मौत को कोई सुरक्षा एजेंसी नहीं रोक सकती ।

लिखना सचमुच अब जोखिम का काम होता जा रहा है। यह विश्वव्यापी भयानक समय है ।

सचमुच निंदनीय !

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 

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