कुछ जगहों पर इनमें अब भी पिलो बेसाल्ट की गोल आकृतियां दिखाई दे जाती हैं। यह वह लावा है, जो पानी के नीचे निकला और समुद्र की तलहटी में ठंडा हुआ था। इन्हीं चट्टानों में धरती पर जीवन के सबसे शुरुआती और व्यापक रूप से स्वीकार किए गए प्रमाण भी मिलते हैं। इन चट्टानों में बारीक दरारें (शेटर कोन्स) भी दिखाई देती हैं। ये नॉर्थ पोल डोम में उल्कापिंड की टक्कर से पैदा हुई तरंगों की जमी हुई छाप हैं और इसका ठोस प्रमाण हैं कि कभी अंतरिक्ष से कोई विशाल पिंड धरती से टकराया था। जियोलॉजी में छपे अध्ययन के अनुसार, यह टक्कर शायद 3.024 अरब साल पहले हुई थी। बाद में, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन ने इसे चुनौती दी। उनका तर्क था कि यह टक्कर 2.7 से 0.4 अरब साल पहले के बीच की रही होगी। दरअसल, दूर-दराज के इलाकों में एक चट्टान का दूसरी से संबंध जोड़ना मुश्किल भरा होता है। ऐसी चट्टानों के भीतर मौजूद छोटे-छोटे क्रिस्टल घड़ी की तरह काम करते हैं और यह रिकॉर्ड कर सकते हैं कि वे कब बने या कब उनमें बदलाव आया। इसे मिनरल डेटिंग (खनिजों की उम्र का पता लगाने की तकनीक) भी कहते हैं। इन चट्टानों में मुख्य खनिज जिरकॉन था, जो समय का हिसाब रखने में अच्छा होता है। इसमें यूरेनियम भी होता है, जो धीरे-धीरे लेड (सीसे) में बदलता रहता है। यूरेनियम और लेड की मात्रा माप कर हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि वह कब बना था, या उसमें कोई बड़ा बदलाव कब आया था। चट्टानों की संरचना में हमें कई तरह के जिरकॉन मिले। इनमें कुछ की उम्र 3.4 अरब साल से भी ज्यादा पुरानी थी। चांद की चट्टानों में भी इसी तरह की जिरकॉन संरचनाएं मिली थीं। अलग-अलग खनिजों और चट्टानों में मौजूद दो घड़ियों ने लगभग 3.02 अरब साल पहले हुई एक ही घटना की ओर इशारा किया। उम्र का पता लगाने की यह कहानी दिखाती है कि पृथ्वी का सबसे पुराना इतिहास खत्म नहीं हुआ है। बस उसे पढ़ना मुश्किल है।
-द कन्वर्सेशन