ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग पृथ्वी पर बड़ी त्रासदी है।
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धरती के फेफड़े जल रहे हैं
गत् वर्ष अमेजन के जंगलों से लेकर ऑस्ट्रेलिया तक भड़की दावानल ने अरबों जीवों का महाविनास करने के साथ ही प्रकृति की पादप और जीवों के बीच की व्यवस्था को ही तहस-नहस कर दिया। जो घने जंगल प्राण वायु ऑक्सीजन का उत्सर्जन करते थे उनके ऊपर कार्बन डाइऑक्साइड के घने बादल मंडरा रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 2019 का साल ऑस्ट्रेलिया के लिए पिछले 125 सालों में सबसे शुष्क और गर्म रहा। हम उत्तराखण्ड सहित उत्तर भारत के लोग इन दिनों ठंड से कांप रहे हैं और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश में 7 जनवरी 2020 का तापमान 40.30 डिग्री सेंटीग्रेट मापा गया। सितम्बर में तो पारा 45 का अंक पार कर गया था। दावानल ने वहां के जंगलों को जीवन विहीन कर दिया है।
मीडिया में जानवरों के बहुत ही दारुण चित्र आ रहे हैं। अगर कोई जीव बचा भी होगा तो वह खाएगा क्या? वहां वनस्पतियां भी तो खाक हो गईं। शेर, तेंदुए, जंगली कुत्ते और हायना जैसे बचे खुचे मांसाहारी जीव भी तभी जीवित रह पाएंगे जब कि जंगलों में हिरन जैसे शिकार बचे हुए हों। पता नहीं सामान्य स्थिति के लाटने में कितने दशक लगेंगे और स्थिति सामान्य हुई भी तो पता नहीं कौन-कौन से प्रजातियां वापस लौट पाएंगी।
100 करोड़ से ज्यादा जीव जल कर मरे
ऑस्ट्रेलिया की दावानल में मरने वाले जीवों के बारे में जो अनुमान आ रहे हैं वे बेहद विचलित करने वाले हैं। सिडनी विश्व विद्यालय के पारिस्थितिकी तंत्र विशेषज्ञ क्रिस डिकमैन ने गत् 8 जनवरी को आग से जल मरने वाले जीवों का जो आंकड़ा दिया है उसके अनुसार ऑस्ट्रेलिया में दावानल से लगभग 100 करोड़ वन्यजीव मारे गए हैं। इनमें से अकेले साउथ वेल्स में 80 करोड़ वन्य जीव शामिल हैं, जिनमें स्तनधारी, पक्षी और रेंगने वाले जीवधारी बताए गए थे। जिनमें कीड़े-मकोड़े, मेंढक और चमगादड़ जैसे जीव शामिल नहीं थे।
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