आम आदमी पार्टी भाजपा और कांग्रेस, दोनों के लिए चुनौती बन रही है।
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वोट प्रतिशत
अब तस्वीर और साफ होगी कि लगभग 35 सीटों पर आम आदमी पार्टी दूसरे नबंर पर है जबकि 12.91 फीसदी वोटों के साथ वह करीब 5 सीटें जीत रही है। ये सारे वोट कांग्रेस के वोट थे। 2017 में क्योंकि उनके वोट प्रतिशत में सीधे-सीधे 14% की कमी आई है और आम आदमी पार्टी के वोट प्रतिशत में 12 प्रतिशत का उछाल है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष असादुद्दीन ओवैसी को कांग्रेस के लिए वोटकटवा माना जा रहा था लेकिन गुजरात के मुसलमानों ने उन पर भरोसा नहीं किया और अभी तक उन्हें 0.29 फीसद वोट मिले हैं।
एक तरफ भाजपा पूरे देश के राजनीतिक दलों के लिए बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है, तो दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी भाजपा और कांग्रेस, दोनों के लिए चुनौती बन रही है। जब सारा देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आंधी में बह चुका था, राजनीति के बड़े-बड़े किले ध्वस्त हो चुके थे और देश में भगवा रंग लहराने लगा था तब केजरीवाल और उनकी पार्टी ने दिल्ली में भाजपा को धूल चटा दी थी।
क्या बदल सकता है राजनीतिक समीकरण?
अब मामला धीरे-धीरे पलट रहा है गुजरात के विधनसभा चुनाव परिणाम और दिल्ली एमसीडी में 'आप' पार्टी की जीत के साथ राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। अरविंद केजरीवाल किसी तरह से भाजपा को खतरा तो पहुंचा नहीं रहे हैं, वे सीधे-सीधे कांग्रेस की राजनीति में सेंध लगा रहे हैं। तो खतरे की घंटी चौतरफा कांग्रेस के लिए बज चुकी है।
कांग्रेस के पास न मोदी-योगी के मुकाबले कोई प्रभावशाली चेहरा है, न वह अपनी बात जनता को समझा पा रही है। कांग्रेस की एक साॅफ्ट हिंदुत्व की भी छवि रही है जो मोदी के उभार के साथ लगातार कम होती गई और अब तो ऐसा लगता है वह छवि बची भी नहीं। भ्रष्टाचार और नरम हिंदुत्व की छवि के साथ केजरीवाल जनता के बीच जाते हैं।
यह सही है कि आम आदमी पार्टी का राजनीति में प्रवेश किसी वैचारिक आंदोलन से नहीं हुआ बल्कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से निकली हुई पार्टी है। भ्रष्टाचार एक मुद्दा है जो तात्कालिक भी हो सकता है और समय के साथ खत्म भी हो सकता है लेकिन राजनीतिक दल दीर्घकालिक विचारों की नींव पर ही टिके होते हैं। आम आदमी पार्टी घोषित रूप से कोई वैचारिक दल नहीं है लेकिन अघोषित रूप से वह लिबरलिज्म को अपनाती जा रही है, जो कि कांग्रेस की वैचारिक जमीन है।
भाजपा जब से सत्ता में आई है तब से वह कांग्रेस पर हमलावर रही है और एक तरह से यह कहें कि वह अपने मकसद में कामयाब भी रही। आम आदमी पार्टी का उभार वैसे तो भाजपा-कांग्रेस दोनों के लिए बड़ी चुनौती है लेकिन ज्यादा खतरा वह कांग्रेस के लिए है। कांग्रेस के लिए एक और बड़ी चुनौती है। अब उसे न सिर्फ भाजपा से लड़ना है बल्कि आम आदमी पार्टी के चतुर युक्तियों से भी ठीक से लड़ना है।
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