एक महीने के बच्चे को छोड़कर काम पर जाती थीं आशा ताई
जब मैंने गाना शुरू किया, तो मैं बंबई (मुंबई) से बहुत दूर रहती थी और गाने के लिए रोज ट्रेन से आती थी। 1949 में, जब मैं 16 साल की थी, तब मेरा बच्चा पैदा हुआ। मुझे अपने एक महीने के बच्चे को घर पर छोड़कर स्टूडियो जाना पड़ता था। हर सुबह पांच बजे मैं रियाज करती थी और घर भी संभालना पड़ता था। गांव के कुएं से पानी भरना, खाना बनाना, सास और देवर की देखभाल करना और काम के बाद देर रात घर लौटना। कई बार परिवार की एकमात्र कमाने वाली सदस्य होने और एकल मां होने के नाते मुझे अपने बच्चों को दूध पिलाने के लिए अक्सर स्टूडियो से जाना पड़ता था, क्योंकि वे बहुत छोटे थे। फिर मैं रिकॉर्डिंग पूरी करने के लिए वापस लौट आती थी।
90 की उम्र में तीन घंटे खड़े होकर गाना गाया
नब्बे साल की उम्र में, मुझे स्टेज पर तीन घंटे खड़े होकर गाने गाने पड़ते हैं। मुझे खुशी है कि मैं इस उम्र में भी ऐसा कर पाती हूं।
संगीत एक दरिया है, जो खत्म नहीं होता
संगीत कभी खत्म नहीं होता, यह दरिया है। अगर कोई कहता है कि 'मैं खुद को पूर्ण मानता हूं', तो ऐसा कहना गलत है, क्योंकि कोई भी अपने आप में पूर्ण नहीं होता। बात हमेशा इस बारे में होती है कि आप समय के साथ कैसे बदल सकते हैं या विकसित हो सकते हैं। मैंने मुख्य कलाकारों और डांसरों के लिए भी गाने गाए हैं। मेरा मानना है कि मैं किसी के भी साथ आसानी से घुल-मिल सकती हूं। लेकिन मेरी इच्छा है कि मैंने अलग-अलग भाषाओं में और भी गाने गाए होते। काश, मैं और ज्यादा शास्त्रीय गायन कर पाती!
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित