प्रसिद्ध वैज्ञानिक, शिक्षाविद डॉ. अनिल सद्गोपाल द्वारा स्थापित इस संस्था ने शिक्षा और ग्रामीण विकास में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। अरविंद गुप्ता ने यहां आकर सस्ती और सुलभ चीजों से विज्ञान सिखाने पर विशेष ध्यान दिया। माचिस की तीलियों और साइकिल के वाल्व ट्यूब से ज्यामितीय आकृतियां बनाकर उन्होंने बच्चों को गणित के सिद्धांत समझाए। बटन से बनी घिरनी के जरिये चक्के और लीवर के सिद्धांत भी सरलता से समझाए जा सकते थे। वह जहां भी रहे, साधारण वस्तुओं में संभावनाएं खोजते रहे। छत्तीसगढ़ के दल्ली-राजहरा में उन्होंने ट्रिपर-ट्रक का मॉडल माचिस से बनाया और बाद में उसे अपनी किताब में शामिल किया।
उन्होंने भारत ज्ञान विज्ञान समिति, नई दिल्ली के साथ मिलकर सौ से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन किया, जिनकी लाखों प्रतियां बिकीं। साथ ही नेशनल बुक ट्रस्ट के सलाहकार के रूप में भी काम किया। कुल मिलाकर, अरविंद गुप्ता का काम कई मायनों में उल्लेखनीय व प्रेरणादायक है। भारत सरकार ने उन्हें उनके कामों के लिए पद्मश्री (2018) से भी सम्मानित किया है। उनके काम न केवल सराहनीय हैं, बल्कि अनुकरणीय भी हैं। (सप्रेस)