प्रकृति में मौजूद हर जीव-जंतुु या वनस्पति में कुछ न कुछ विशेषता होती ही है, जो संतुलन के लिए बेहद उपयोगी और जरूरी होती है। इसी क्रम में कैंसर के लिए भी एक राह आसान होती दिख रही है। मधुमक्खी के डंक से कैंसर के इलाज की दिशा में किए गए शोध के परिणाम बेहद सकारात्मक रहे हैं।
मधुमक्खी के डंक में पेप्टाइड्स और एंजाइम्स जैसे सक्रिय अणु होते हैं। शोधों से पता चला है कि ये तत्व सूजन और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से संबंधित रोगों-जैसे अल्जाइमर, पार्किंसन, एमियोट्राफिक लैटरल स्केलोरोसिस के इलाज में काफी लाभकारी होते हैं।
अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के एक शोध पत्र के अनुसार, मधुमक्खी का विष न केवल विभिन्न प्रकार के कैंसर से लड़ने में प्रभावी है, बल्कि उसमें एचआईवी से लड़ने सहित कई एंटी वायरल गुण भी पाए जाते हैं। मधुमक्खी के डंक में मौजूद मेलिटिन न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों में तंत्रिका तंत्र की रक्षा करने और उसकी कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद कर सकता है।
चिकित्सा के लिए लाभकारी तत्व मधुमक्खियों के पेट के भीतरी भाग में स्थित एक ग्रंथि द्वारा उत्पादित एक स्पष्ट, गंधहीन, कड़वा तरल पदार्थ होता है। यह मुख्यतः पानी से बना होता है। इसमें प्रोटीन, एंजाइम और अमीनो अम्लों का एक जटिल मिश्रण होता है। इसके अलावा, मेलिटिन सहित जैव-सक्रिय यौगिक भी पाए जाते हैं। मेलिटिन एक पेप्टाइड है। इसमें ट्यूमररोधी गुण पाए गए हैं।
स्तन कैंसर की कुछ कोशिकाओं पर अध्ययन में पाया गया कि मेलिटिन उन्हें निष्क्रिय कर सकता है। चिकित्सा जगत को उम्मीद है कि इससे ट्रिपल-नेगेटिव स्तन कैंसर पीड़ितों के इलाज के विकल्प के रास्ते जल्द खुलेंगे। शोधों से यह भी संकेत मिला है कि मधुमक्खी का डंक कीमोथेरेपी के साथ मिलकर ज्यादा प्रभावी हो सकता है।
मधुमक्खी के डंक में मेलिटिन सहित जैव-सक्रिय यौगिक भी होते हैं। मेलिटिन में ट्यूमररोधी गुण पाए गए हैं। शोधों के अनुसार, मधुमक्खी का डंक कीमोथेरेपी के साथ मिलकर ज्यादा प्रभावी हो सकता है। हालांकि, इसे अभी स्वीकृति नहीं मिली है।
हालांकि, इस चिकित्सा पद्धति को अभी स्वीकृति नहीं मिली है और चिकित्सकीय परीक्षणों, खुराक व प्रशासन विधियों को लेकर काफी काम बाकी है। पर, इतना तो तय है कि भविष्य में मधुमक्खी और उसका जहर चिकित्सा जगत के लिए बड़ी उपलब्धि और वरदान साबित हो सकता है।