अमेरिका में अश्वेत के साथ भेदभाव का पुराना इतिहास है।
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इसी आंदोलन के बीच 1963 में अपने दिए गए एक भाषण में मार्टिन लूथर किंग ने कहा था कि आज मुक्ति उद्घोषणा के सौ साल बाद भी अश्वेत अमेरिकी अपने देश में ही खुद को निर्वासित पाता है और समाज के कोनों में सड़ रहा है।
उन्होंने कहा था कि मेरा एक स्वप्न है कि भविष्य का अमेरिका ऐसा हो जहां मेरे बच्चे अपने रंग से नही अपने काम और चरित्र से पहचाने जाएं।
उसके बाद भी वर्ष 1919 में शिकागो दंगे हुए, 1992 में लांस एंजेल्स दंगों ने अमेरिका पर दाग लगाया। साल 2014 जुलाई में ठीक इसी तरह का वीडियो सामने आया था जब न्यूयॉर्क में एक अश्वेत पिता एरिक गार्नर को पुलिस द्वारा इसी तरह मारा गया था।
वर्ष 2014 में ही अमेरिका के क्लेवलेंड, ओहियो में एक बारह वर्षीय बच्चे तामिर राइस को पिस्तौल लेकर घूमने की सूचना पर पुलिस कर्मियों ने गोली मार दी जिससे उसकी मौत हो गई थी। जांंच में पाया गया कि बच्चे के पास वह पिस्तौल नकली थी।
इसी साल 23 फरवरी में अहमद अरबरी नामक अश्वेत अमेरिकी को जॉगिंग करते हुए उसके घर के पास ही लुटेरा समझ कर श्वेत पिता-पुत्र ने मिलकर गोली मार दी थी।
अमेरिकी अखबार 'द गार्जियन' द्वारा कराए गए एक सर्वे के अनुसार अमेरिका में पुलिस द्वारा प्रति दस लाख लोगों में मारे गए 7.13 लोग अश्वेत होते हैं वही मारे गए श्वेतों की संख्या 2.91 है। अमेरिका में पुलिस द्वारा एक साल में एक हजार लोग मारे जाते हैं।
बराक ओबामा जब अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने थे।
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बराक ओबामा जब अमेरिका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने थे तब यह लगा था कि अब नस्लीय भेदभाव वाला अमेरिका पीछे छूट गया है पर ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद स्थिति और बदतर हो गई। ट्रंप का नस्लीय भेदभाव से पुराना नाता रहा है।
1973 में ट्रंप पर आरोप लगे थे कि उन्होंने रंग के आधार पर अपने फ्लैट किराए पर दिए थे। अश्वेतों को अपने फ्लैट किराए पर देने से उन्होंने साफ मना कर दिया था।
1980 में किप ब्राउन जो ट्रंप बिल्डिंग के पुराने कर्मचारी थे उन्होंने ट्रंप पर यह आरोप लगाया था कि जब ट्रंप कैसिनो में आते थे तो अश्वेतों को वहां से हटने के लिए कहा जाता था।
वर्ष 1989 में बलात्कार के आरोप में सजा होने के बाद मुक्त हो चुके पांच अश्वेत नागरिकों पर ट्रंप ने 2016 में बयान दिया था कि वह अब भी मानते हैं कि वो पांचों दोषी थे।
2015 में मेक्सिकन अप्रवासियों को ट्रम्प ने अपराधी, बलात्कारी और नशे का कारोबार करने वाला कहा था। 2016 में उन्होंने अश्वेतों को गरीबी में जीने वाला कहा था। ट्रंप हमेशा से ओबामा के विरोधी भी रहे हैं।
मिनिपोलिस पुलिस ने पिछले साल ट्रंप की एक रैली में 'कॉप्स फॅार ट्रंप' नारे की टीशर्ट पहन कर उनका स्वागत किया था। न
स्लीय भेदभाव के खिलाफ हो रहे इन विरोधों के बीच ट्रंप ने ट्विट कर इन प्रदर्शनकारियों को ठग्स(डाकू, अपराधी) कहा है। जिसे ट्विटर ने हिंसा भड़काने वाला ट्वीट कहा है।
व्हाइट हाउस के सामने यह प्रदर्शन इतना बढ़ गया था कि सुरक्षा कारणों से ट्रंप को बंकर में ले जाया गया। अब देखना यह होगा कि जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद हो रहे यह प्रदर्शन भविष्य के अमेरिका में कुछ बदलाव ला पाएंगे या नहीं।
कोरोना की वजह से पहले ही आर्थिक रूप से टूट रहे अमेरिका को अपनी विश्व महाशक्ति की छवि बरकरार रखने के लिए गोरे-काले के इस तिलिस्म को तोड़कर हर नागरिक को एक ही नजर से देखना शुरू करना होगा। मार्टिन लूथर किंग ने श्वेत अश्वेत की धारणा मुक्त जो अमेरिका देखा था वह तभी संभव हो पाएगा।
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