रंजनी-गायत्री बहनों ने लगभग ढाई घंटे की प्रस्तुति दी। जिसमें राग कबीर, हंसध्वनि और राग वृंदावन पर आधारित बन्दिशें प्रमुख थी। इसके बाद प्रख्यात सरोद वादक बसंत काबरा ने से माहौल सुरमय बनाया। त्रिपुरा से आए रवींद्र भारती ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत गायन कि प्रस्तुत दी। पूरी रात चलने वाले इस कार्यक्रम में आधी रात के बाद दिल्ली के पांच युवा कलाकार, ज़हीन खान- तबला, मुद्दसर-सारंगी, वरुण राजशेखरन-घटम, मनोहर बालचंद्रने - मृदंगम, सलमान खान-पखावज पर अपनी-अपनी संयुक्त प्रस्तुतियां दी।
इस अवसर पर आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि यह केंद्र पुरानी परंपराओं को जीवित रखने में प्रयासरत है और इसी कड़ी में दिल्ली के संगीत प्रेमियों हेतु केंद्र पिछले 2 साल से लगातार रात भर चलने वाली संगीत सभा का आयोजन कर रहा है। इस वर्ष फिर से हमने अपने स्थापना दिवस के अवसर तृतीय अखिल रात्रि संगीत सभा का आयोजन किया है। उन्होंने कहा कि जब रात भर चलने वाले इस संगीत समारोह को शुरू किया गया तो मन में थोड़ा संशय था कि क्या आज के समय में इस प्रकार के समारोह सफल होंगे भी या नहीं? लेकिन आज तीसरे वर्ष में यहां सैकड़ों कि संख्या में मौजूद श्रोताओं को देखकर मन खुश है जिसमें भारी संख्या युवाओं की है।
रातभर चले इस संगीत समारोह में अदनान खान ने सितार पर राग मालकोश कि प्रस्तुति दी। उन्होंने सितार में उस्ताद आमिर खान साहब कि बंदिश “आज मोरे घर आए” बजाया तो दर्शक झूम उठे। बेंगलुरु से आए प्रसिद्ध बांसुरी वादक पंडित प्रवीण गोदखिंडी ने दिन के प्रथम पहर में बांसुरी पर राग अहीर ललत की प्रस्तुति दी । इस समारोह कि अंतिम प्रस्तुति मेवात घराने के पंडित संजीव अभ्यंकर द्वारा हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन कि थी, जिसमें उन्होने ‘राग मिया कि टोडी’ राग भटियारी में भगवान कृष्ण पर आधारित बन्दिशों को प्रस्तुत किया। रात भरे चले इस समारोह का शुभारंभ 23 नवंबर को शाम 7 बजे रंजनी-गायत्री के गायन से हुआ व 24 नवंबर की सुबह 7:30 बजे संजीव अभयंकर के गायन से समाप्त हुआ ।
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