इसी को ध्यान में रखते हुए इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ एस्ट्रोनॉटिक्स (आईएए) की सेटी समिति ने हाल ही में अपने ‘पोस्ट-डिटेक्शन प्रोटोकॉल’ में व्यापक संशोधन किए हैं। ये वे दिशा-निर्देश हैं, जिनका पालन तब किया जाएगा, जब पृथ्वी को किसी संभावित एलियंस का संकेत प्राप्त होगा। नियमों का पिछला संस्करण 2010 में तैयार किया गया था। पर, आज के दैर में फर्जी खबरें और कृत्रिम रूप से तैयार किए गए वीडियो एलियंस से जुड़े किसी भी अपुष्ट दावे को कुछ ही मिनटों में दुनियाभर में फैला सकते हैं। यही कारण है कि संशोधित नियम स्पष्ट रूप से कहते हैं कि किसी भी असामान्य संकेत को तुरंत एलियन संदेश घोषित नहीं किया जाएगा। पहले खोज करने वाले वैज्ञानिक खुद उसकी पुष्टि करेंगे। पुष्टि होने पर ही उसे सार्वजनिक किया जाएगा। हालांकि, संवेदनशील प्रश्न यह है कि क्या एलियंस से मिले किसी संदेश का जवाब देना चाहिए? नियमों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी संभावित एलियन संदेश का उत्तर कोई एक देश, संस्था या वैज्ञानिक समूह अपने स्तर पर नहीं भेज सकेगा। इसके लिए व्यापक वैश्विक सहमति, अंतरराष्ट्रीय परामर्श और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों की भागीदारी आवश्यक होगी। ऐसी कोई भी खोज मानव इतिहास की सबसे परिवर्तनकारी घटना होगी, इसीलिए इसके दीर्घकालिक सामाजिक प्रभावों के प्रबंधन के लिए नैतिकता, कानून और सामाजिक विज्ञान के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की एक स्थायी उपसमिति बनाई जा रही है।
आईएए की संशोधित घोषणा अगस्त 2026 में तुर्किये की इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉटिकल कांग्रेस में पेश होगी, जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र इसकी समीक्षा करेगा। स्पष्ट है कि यदि कभी एलियंस का संदेश मिलता है, तो दुनिया उसे समझने, सत्यापित करने और मिलकर जवाब देने के लिए पहले से अधिक तैयार होगी।
-द कन्वर्सेशन