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मुंबई एयरपोर्ट पर प्रदर्शन: सड़कों पर एयर इंडिया के रखरखाव इंजीनियर, यात्रियों की सुरक्षा पर सवालिया निशान

सार

एआईएएसएल भारत की सबसे बड़ी विमान रखरखाव कंपनी है, जो एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के बेड़े की देखभाल करती है। कर्मचारियों की मुख्य मांगें हैं- वेतन संशोधन, महंगाई भत्ता, पदोन्नति नीति में बदलाव, इस्तीफे पर रोक लगाने वाली एनओसी नीति का खारिज होना और समान काम के लिए समान वेतन।
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एअर इंडिया - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारतीय विमानन उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है। एयर इंडिया टाटा ग्रुप के अधिग्रहण के बाद नई उड़ानों, नए विमानों और वैश्विक महत्वाकांक्षाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। लेकिन इसी विस्तार के बीच एक गंभीर चिंता उभर रही है।  जो लोग इन विमानों को उड़ान भरने लायक बनाते हैं, वे खुद सड़कों पर उतर आए हैं।

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एयर इंडिया इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड (एआईएएसएल) के रखरखाव इंजीनियर और तकनीशियन लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। क्या यह सिर्फ एक श्रमिक आंदोलन है या यात्री सुरक्षा की नींव हिल रही है?

ताजा मामला 27 मई का है जहां दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट AI 173 (बोइंग 777-300ER) लगभग 230 यात्रियों के साथ उड़ान भरने के करीब 9 घंटे बाद दिल्ली वापस लौट आई। जिसका कारण एक तकनीकी खराबी बताया जा रहा है। संभवतः TCAS (Traffic Collision Avoidance System) से संबंधित समस्या के चलते फ्लाइट को चीन के एयरस्पेस में रहते हुए वापस मोड़ दिया गया। फ्लाइट सुरक्षित रूप से दिल्ली लैंड हो गई।
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एयर इंडिया ने कहा कि सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत यह फैसला लिया गया और विमान की विस्तृत जांच की जाएगी। ऐसे में इस घटना को एआईएएसएल के इंजीनियरों के आंदोलन से जोड़ना गलत नहीं होगा।  

एआईएएसएल भारत की सबसे बड़ी विमान रखरखाव कंपनी है, जो एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के बेड़े की देखभाल करती है। इसमें ए320, बोइंग 777, 787 जैसे विमानों का रखरखाव होता है। मई 2026 में शुरू हुए इस विरोध में इंजीनियरों ने काम बंद कर दिया या धीमा कर दिया है। इन कर्मचारियों की मुख्य मांगें हैं: वेतन संशोधन, महंगाई भत्ता, पदोन्नति नीति में बदलाव, इस्तीफे पर रोक लगाने वाली एनओसी नीति का खारिज होना और समान काम के लिए समान वेतन।

कर्मचारियों का आरोप है कि नई नीतियां उन्हें अन्य कंपनियों में जाने से रोक रही हैं, जिससे करियर विकास रुक गया है। कई दिनों से नागपुर, दिल्ली, कोलकाता समेत विभिन्न ठिकानों पर इन कर्मचारियों के प्रदर्शन चल रहे हैं।

यह आंदोलन अचानक नहीं जन्मा। दरअसल एआईएएसएल में लंबे समय से अनुबंधित और स्थायी कर्मचारियों के बीच भेदभाव, विलंबित वेतन संशोधन और निजीकरण की आशंका चली आ रही है। टाटा ग्रुप के अधिग्रहण के बाद यह कंपनी टाटा समूह को नहीं दी गई। ये अभी तक भारत सरकार के अधीन ही है।

काफी समय से एआईएएसएल को आधुनिक बनाने के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कर्मचारियों की शिकायतें अनसुनी रहीं हैं। इंजीनियरों का कहना है कि बिना उचित मुआवजे और सुरक्षा के वे 12-14 घंटे काम कर रहे हैं।

गौरतलब है कि विमान रखरखाव एक अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। डीजीसीए के नियमों के अनुसार हर रखरखाव कार्य प्रमाणित इंजीनियर की देखरेख में होना चाहिए। यहां सवाल उठता है कि अगर अनुभवी इंजीनियर असंतुष्ट हैं, तो क्या गुणवत्ता प्रभावित नहीं होगी?

भारतीय विमानन में सुरक्षा पर उठते सवाल

हाल के वर्षों में भारतीय विमानन में सुरक्षा पर कई सवाल उठे हैं। भले ही एयर इंडिया का रिकॉर्ड सुधर रहा हो, लेकिन रखरखाव से जुड़ी कोई भी लापरवाही घातक साबित हो सकती है। इंजीनियरों के विरोध ने इस बात को रेखांकित किया है कि मानव संसाधन प्रबंधन बिना ठीक किए विमानन सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती।

जब तकनीशियन तीसरे पक्ष की कंपनियों पर निर्भर हो जाते हैं, तो अनुभव की कमी और समन्वय की समस्या पैदा होती है।

एआईएएसएल का विरोध एयर इंडिया के संचालन को सीधे प्रभावित कर रहा है। उड़ानें विलंबित हो रही हैं, कुछ मामलों में तीसरे पक्ष के इंजीनियरों को बुलाया जा रहा है। इससे अतिरिक्त खर्च बढ़ा रहा है और यात्री असुविधा का कारण भी बन रहा है। एक ओर भारत में विमानन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लाखों नौकरियां पैदा हो रही हैं, लेकिन वहीं अगर कुशल इंजीनियरों का पलायन होता रहा तो इसका दीर्घकालिक नुकसान होगा।

वैश्विक स्तर पर भी विमान रखरखाव उद्योग में कुशल कर्मियों की कमी है। बोइंग और एयरबस जैसे निर्माता नई तकनीक ला रहे हैं, लेकिन भारत में प्रशिक्षण और प्रतिधारण की चुनौतियां बनी हुई हैं। एआईएएसएल कर्मचारियों की मांगें न केवल वेतन से जुड़ी हैं, बल्कि करियर सुरक्षा और सम्मान से भी।

अगर ये मुद्दे हल नहीं हुए तो बेहतर अवसर तलाशने वाले इंजीनियर निजी MRO (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल) कंपनियों में या विदेश चले जाएंगे।

कर्मियों का मनोबल और प्रशिक्षण महत्वपूर्ण

विमानन क्षेत्र में सुरक्षा सबसे ऊपर होनी चाहिए। अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के मानकों के अनुसार, रखरखाव कर्मियों का मनोबल और प्रशिक्षण महत्वपूर्ण हैं। अगर इंजीनियर महसूस करते हैं कि उनकी चिंताएं अनसुनी हैं, तो वे पूर्ण रूप से अपने काम पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाएंगे। यह ‘सेफ्टी कल्चर’ को कमजोर करता है।

सरकार और प्रबंधन को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए। टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया को पुनर्जीवित करने में अच्छा काम किया है। लेकिन सरकार के अधीन एआईएएसएल को भी अपने कर्मचारियों को संतुष्ट करने की राह में ठोस कदम उठाने होंगे।

वहीं एआईएएसएल के निजीकरण की चर्चाएं भी चल रही हैं, जो कर्मचारियों में अनिश्चितता पैदा कर रही हैं। ऐसे में कंपनी द्वारा संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है, जहां दक्षता बढ़े और कर्मचारी भी सुरक्षित महसूस करें।


ऐसे में इस गंभीर समस्या के समाधान के बारे में कुछ सुझाव पर सरकार को विचार करना चाहिए। 

1. संवाद: प्रबंधन और यूनियन के बीच तत्काल बातचीत शुरू होनी चाहिए। मध्यस्थता का सहारा लिया जा सकता है।
2. नीति सुधार: NOC नीति की समीक्षा करें। कर्मचारियों को करियर विकास का अवसर दें।
3. वेतन और भत्ते: बाजार के अनुरूप संशोधन और महंगाई भत्ता लागू करें।
4. प्रशिक्षण: नए इंजीनियरों के लिए बेहतर ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करें ताकि निर्भरता कम हो।
5. सुरक्षा ऑडिट: DGCA स्वतंत्र ऑडिट कराए और रिपोर्ट सार्वजनिक करे ताकि यात्री आश्वस्त हों।


यह आंदोलन सिर्फ एआईएएसएल का नहीं है। यह पूरे भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए चेतावनी है। जब रखरखाव इंजीनियर सड़क पर हैं, तो आसमान पर उड़ने वाले यात्री चिंतित हो सकते हैं। जहाँ एयर इंडिया की छवि सुधारने के लिए टाटा ग्रुप ने बहुत प्रयास किए, वहीं सरकार को चाहिए कि जमीनी स्तर पर भी सुधार हो।

भारत का विमानन उद्योग विश्व पटल पर अपनी जगह बना रहा है, जिसकी नींव मजबूत और अनुभवी इंजीनियरों पर टिकी है। उनकी मांगें जायज हैं और इन्हें जल्द हल करना चाहिए। सुरक्षा कोई समझौता नहीं मांगती। अगर आज हम इन आवाजों को अनसुना करेंगे, तो कल बड़े खतरे खड़े हो सकते हैं।

सरकार, प्रबंधन और कर्मचारी- तीनों को मिलकर काम करना होगा। यात्री सुरक्षा सर्वोपरि है। यह मुद्दा न सिर्फ श्रम अधिकारों का है, बल्कि राष्ट्रीय महत्व का भी है। 



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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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