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एआई बन रहा गृहिणियों का सहारा: तकनीक सहायक बन सकती है, लेकिन आंख बंद कर भरोसा करना जोखिम भरा

Sat, 17 Oct 2026 09:47 AM IST
ज्योति भास्कर अलीशा हरिदसानी गुप्ता, द न्यूयॉर्क टाइम्स

सार

गृहिणियों के कभी खत्म न होने वाले कामों में एआई सहायक हो सकता है। पर, इस पर आंख बंद कर भरोसा करना जोखिम भरा है।
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घरेलू काम में मददगार हो सकती है तकनीक - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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हाल ही में एक शाम, लिसा ग्रीन का पांच साल का बेटा फिट्ज स्कूल से उदास होकर लौटा। वह स्कूल की लाइब्रेरी से किताब नहीं ले सका, क्योंकि उसने पिछली किताब वापस नहीं की थी। ग्रीन को याद ही नहीं रहा कि लाइब्रेरी की किताब किस दिन लौटानी है। हालांकि, इसके लिए स्कूल ने एक प्रिंटेड शेड्यूल दिया था। इस समस्या के समाधान के लिए ग्रीन ने उस शेड्यूल की फोटो ‘ओली’ नामक एआई एजेंट पर अपलोड कर दी। अब उन्हें किताब लौटाने से पहले उसे बैग में रखने का रिमाइंडर मिल जाता है। इससे ग्रीन को काफी राहत मिली।

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एक सर्वे में हर तीन में से दो माता-पिता ने बताया कि एआई ने उनका मानसिक बोझ कम किया है और हर सप्ताह औसतन 58 मिनट से अधिक समय बचाया है। वहीं, मेनलो वेंचर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 84 प्रतिशत माता-पिता खाने की योजना बनाने, बिल भरने और घरेलू कामों के प्रबंधन में एआई का इस्तेमाल करते हैं। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए ‘ओली’, ‘फैम्बॉट’, ‘ओहाई’ और ‘एवा’ जैसे एप बनाए गए हैं। ये घर के कामों को संभालने में मदद करते हैं। इनका इस्तेमाल करने वालों में ज्यादातर गृहिणियां ही हैं। हालांकि, कुछ माता-पिता चैटजीपीटी और क्लॉड जैसे एआई टूल्स की मदद से भी अपने काम आसान बनाते हैं। ये एजेंट ई-मेल, कैलेंडर और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से जानकारी लेकर जरूरी कामों की याद दिलाते हैं, कार्यक्रमों में बदलाव की सूचना देते हैं और शेड्यूल के टकराव की पहचान करते हैं।

न्यू जर्सी के जोश सोबिन ने परिवार के ई-मेल को व्यवस्थित करने के लिए ‘फैम्बॉट’ का इस्तेमाल शुरू किया। उनके परिवार को बच्चों के मैथ्स क्विज, स्कूल के कार्यक्रम और अन्य गतिविधियों से जुड़े कई ई-मेल मिलते थे। अब एप इन जानकारियों को साझा कामों की सूची में बदल देता है और बताता है कि किस काम की जिम्मेदारी किसकी है। सोबिन के मुताबिक, इससे परिवार को जरूरी कामों और बच्चों के साथ समय बिताने पर ध्यान देने में मदद मिलती है। टेक्सास की तारा युकावा भी रात का खाना बनाते समय चैटजीपीटी या क्लॉड की मदद से अपने बेटे को अंग्रेजी की वर्तनी याद कराती हैं। इसके लिए वह शब्दों की सूची की तस्वीर एप पर डालती हैं। फिर, एप से उन शब्दों को जोर से बोलकर सुनाने को कहती हैं। इससे बेटा आसानी से अभ्यास कर लेता है और पढ़ाई के दौरान होने वाला तनाव भी कम होता है।
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हालांकि, इन एप्स से गलतियां भी हो सकती हैं। इसके अलावा, इनसे जुड़ी सबसे बड़ी चिंता बच्चों और परिवार की निजी जानकारी सुरक्षित रखने को लेकर है। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल एआई की निदेशक जूलिया स्टोयानोविच के अनुसार, यह स्पष्ट नहीं है कि इन एप्स पर अपलोड किए गए डाटा का इस्तेमाल कैसे किया जाएगा और उसे कहां सुरक्षित रखा जाएगा। स्टोयानोविच यह भी सवाल उठाती हैं कि यदि कोई एजेंट बच्चे को लेने जाने की याद दिलाना भूल जाए, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? वहीं, ‘मॉम्स फर्स्ट’ की संस्थापक रेशमा सौजानी के मुताबिक, एआई प्रशासनिक कामों में मदद कर सकता है, पर इससे माता-पिता पर उम्मीदों और जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ भी सकता है। इन एजेंट्स को सही ढंग से काम करने के लिए माता-पिता को परिवार के सदस्यों की उम्र, एलर्जी, रोजमर्रा के कामों की जानकारी देनी पड़ती है। साथ ही, स्कूल के व्हाट्सएप ग्रुप, न्यूजलेटर, एप और विभिन्न कार्यक्रमों से जानकारी जुटाकर उसे एक जगह रखना होता है। इन कामों में काफी वक्त और मेहनत लगती है। इतिहास में भी ऐसी मिसालें हैं कि तकनीक हमेशा काम कम नहीं करती। इतिहासकार रूथ श्वार्ट्ज कोवान ने अपनी किताब मोर वर्क फॉर मदर में बताया है कि वॉशिंग मशीन आने से कपड़े धोना बेशक आसान हुआ, पर घरेलू कामों की जिम्मेदारी आखिरकार महिलाओं के ही जिम्मे रही। इसलिए, जरूरी नहीं कि हर नई तकनीक महिलाओं का बोझ कम ही करे।

फिलहाल, नॉर्थ कैरोलिना की स्टेफनी टाइटस जैसी माताओं के लिए तो एआई राहत का साधन है। टाइटस को अपनी बेटी के कार्यक्रम के लिए काले मोजे खरीदने थे। इस बारे में जानकारी एक लंबे ई-मेल में छिपी थी, जिसे वह पढ़ नहीं पाईं। पर, ओली ने उन्हें समय पर याद दिलाया। टाइटस ने मोजे मंगवाए और इस चिंता से मुक्त हो गईं। -साथ में, केटी वैन सिकल

म्यूज वंडर
म्यूज वंडर मेटा द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक एआई मॉडल है, जिसे व्यावसायिक व व्यक्तिगत, दोनों स्तरों पर जटिल और एजेंटिक कार्यों को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी ‘एक्टिव मेमोरी’ लंबी बातचीत और पिछले संदर्भों में से जरूरी जानकारियों को याद रखकर सही समय पर उपयोग करने में मदद करती है, वहीं ‘एक्टिव फोकस’ फीचर किसी भी काम या कोडिंग प्रोजेक्ट में आने वाली रुकावटों और असफलताओं के बावजूद समाधान ढूंढने में सहायक है। जटिल इंजीनियरिंग कार्यों, मल्टी-फाइल कोड रीफैक्टरिंग और घंटों चलने वाली स्वचालन प्रक्रियाओं के लिए यह मॉडल बेहद उपयोगी है।

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