AI Is Renting Human Labour
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इसी कमी को पूरा करने के लिए अब एआई इंसानों की मदद ले रहा है। Model Context Protocol (MCP) नाम की एक खास तकनीक के जरिए एआई किसी इंसान को ठीक वैसे ही इस्तेमाल कर सकता है, जैसे वह किसी क्लाउड सर्विस का उपयोग करता है। एआई इंसान को काम के निर्देश देता है, यह कन्फर्म करता है कि काम पूरा हुआ या नहीं? इसके बाद अपने सिस्टम के जरिए उसकी पेमेंट भी कर देता है।
इस मॉडल में इंसान एआई का मालिक नहीं बल्कि उसका एक्सटेंशन बन जाता है, जो डिजिटल दुनिया और भौतिक दुनिया के बीच की खाई को पाटने का काम करता है। यही वजह है कि आने वाले समय में एआई द्वारा इंसानों को हायर करना एक असामान्य नहीं, बल्कि सामान्य प्रक्रिया बन सकती है।
इस बदलाव का सीधा असर हमें आने वाले समय में जॉब मार्केट में दिखने को मिल सकता है। भविष्य में स्थायी नौकरियों की जगह टास्क आधारित काम बढ़ सकता है। इंसान अब कर्मचारी नहीं, बल्कि ह्यूमन रिसोर्स ऑन कॉल बन सकते हैं।
हालांकि यह मॉडल केवल खतरे नहीं, बल्कि नए अवसर भी लाते हैं। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के लोग भी वैश्विक एआई सिस्टम्स के लिए काम कर सकते हैं। सही कौशल होने पर भाषा, क्रिएटिविटी, डाटा वेरिफिकेशन और लोकल नॉलेज जैसे कामों में इंसानों की मांग बनी रहेगी, जहां एआई अभी पूरी तरह सक्षम नहीं है।
हालांकि, सवाल यह है कि अगर एआई इंसानों को हायर कर रहा है, तो जवाबदेही किसकी होगी? डाटा सुरक्षा, पेमेंट और अन्य मुद्दों पर स्पष्ट नियमों की जरूरत होगी। अगर इस पर कोई रेगुलेशन नहीं आता भविष्य में तो यह सिस्टम शोषण का रूप भी ले सकता है।
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