मुस्लिम ट्रस्ट से संचालित होने वाले खैर इंटर कॉलेज से उत्तरप्रदेश मेरिट सूची में आने वाले बच्चों का नाम देखने पर एहसास होता है कि साझी विरासत क्या होती है और उसकी परवरिश कैसे की जाती है। बेगम खैर इंटर कॉलेज में पढ़ने वाली लड़कियों की हरी ड्रेस उनके घर वालों के लिए सरस्वती का रंग है जिसकी पवित्रता घर में रखे भगवान के वस्त्र की तरह है।
सन 2000 में सरस्वती विद्या मंदिर,रामबाग में एक मुस्लिम परिवार के बालक का प्रवेश हुआ जो पूरी विद्या भारती के लिए असहज और अचंभित करने वाला विषय था। वह लड़का सुबह प्रार्थना करता, दोपहर में भोजन मंत्र पढ़ता और छुट्टी के समय वन्देमातरम गाकर घर जाता, इन तमाम घटनाओं से बस्ती शहर के सोशल फेब्रिक की मजबूती को समझा जा सकता है।
बस्ती की क्रांतिकारी पहचान वीरांगना रानी तलाश कुंवरि हैं, जिन्होंने अंग्रेजो से लड़ाई लड़ी और जो बस्ती में रानी अमोढ़ा के नाम से जनप्रिय हैं। बस्ती की साहित्यिक पहचान आचार्य रामचंद्र शुक्ल, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना और लक्ष्मीकांत वर्मा हैं जिन्होंने अपने लेखन से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। आज बस्ती की पहचान जिले के वे मेधा सम्पन्न विद्यार्थी हैं जिन्होंने राष्ट्रीय पटल पर अपनी शैक्षणिक क्षमता का परिचय दिया है। आज रंगमंच से लेकर बॉलीवुड तक जिले के युवा काम कर रहें हैं।
बस्ती की पहचान को एक पुरातन ऋषि की कुटिया तक समेटना वहां के लोगों के विस्तार को समेटने जैसा है। बस्ती जिले में महर्षि वशिष्ठ की कुटिया हो सकती है लेकिन महर्षि वशिष्ठ की कुटिया के अंदर बस्ती का होना संभव नहीं। काश! लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार, लोकतांत्रिक तरीके से काम भी करती तो आज नाम परिवर्तन का नामोनिशां न होता।
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