स्वतंत्रता दिवस- चावल के दाने पर राष्ट्रीय ध्वज
- फोटो : Vinod Pathak
अति लघु हस्तलिखित श्रीमद्भगवद् गीता की भी कर चुके हैं रचना
डॉ. राजोरिया एक विलक्षण और समर्पित सूक्ष्म कलाकार हैं। इन्होंने विश्व की अति लघु हस्तलिखित श्रीमद्भगवद् गीता की अद्वितीय रचना की है, जिसमें श्रीमद्भगवद्गीता के संपूर्ण 18 अध्यायों और 700 श्लोकों को मात्र 3.5 इंच ×5 इंच आकार की एक्रेलिक शीट पर हस्तलिखित रूप में उकेरा गया है। यह अत्यंत सूक्ष्म एवं साधनापूर्ण कार्य दो वर्षों की अथक मेहनत से संपन्न हुआ, जो न केवल आध्यात्मिक भक्ति का प्रतीक है, बल्कि भारतीय लघु लेखन-कला का एक अनमोल उदाहरण भी है। इसे एक्सक्लुसिव बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने विश्व रिकॉर्ड के रूप में मान्यता दी है।
डॉ. राजोरिया द्वारा चावल के दानों पर भी अद्भुत और सूक्ष्म कलात्मक कार्य किए गए हैं। इन्होंने एक चावल के दाने पर 203 हाथियों की प्रतिमाएं, 4000 सूक्ष्म अक्षर, णमोकार मंत्र और गायत्री मंत्र लिखा है। चावल के एक ही दाने पर उन्होंने 21 गणेश प्रतिमाएं उकेरना और देश की प्रसिद्ध हस्तियों के छायाचित्रों का सूक्ष्म चित्रण करना जैसे असंभव प्रतीत होने वाले कार्य भी संभव कर दिखाए हैं।
डॉ. राजोरिया को अब तक 11 अंतरराष्ट्रीय विश्व रिकॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका है। घाना की वेबिक यूनिवर्सिटी द्वारा उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी प्रदान की गई है। उनका उद्देश्य अपनी कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और सूक्ष्म चित्रण की परंपरा को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठा दिलाना है, जिसके लिए वे निरंतर समर्पण और श्रद्धा के साथ कार्य कर रहे हैं।
उनका यह प्रयास न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी अपनी कला और प्रतिभा के माध्यम से राष्ट्र के लिए योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा।
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