राकेट के आविष्कारक को पुलिस की प्रताड़ना सहनी पड़ी
अमेरिका के भौतिक विज्ञानी गोड्डार्ड ने जब 1926 में आसमान में राकेट दागने के अपने परीक्षण शुरू किए तो उन्हें लोगों ने सिरफिरा ही नहीं माना बल्कि पुलिस से प्रताड़ित तक करा डाला। लेकिन आर्थिक तंगी, पड़ोसियों और किसानों के विरोध तथा पुलिस की प्रताड़ना के बावजूद गोड्डार्ड ने अपने परीक्षण जारी रखे और एक दिन वह आवाज से तेज गति से चलने वाले द्रव्य ऊर्जा चालित राकेट का परीक्षण करने में सफल होने के साथ ही भविष्य के वैज्ञानिकों को अन्तरिक्ष का रास्ता दिखा ही गया।
दरअसल, गोड्डार्ड ने सबसे पहले मार्च 1926 में मैसाचुसैट के औबर्न में अपनी आण्टी इफी के फॉर्म से अपने पहले राकेट का परीक्षण किया था। उसका पहला राकेट 1.2 मीटर लम्बा या ऊंचा था जिसे एक ट्रक पर लादकर फॉर्म में एक लैम्प के जरिये ईंधन सुलगा कर दागा गया था। उसके बाद उसने पिछले राकेट से काफी बड़ा राकेट तैयार किया जिस पर बैरोमीटर, कैमरा और थर्मामीटर भी फिट किए गए थे।
इस राकेट को दागने में इतना शोर हुआ कि पड़ोसी गोड्डार्ड की शिकायत करने पुलिस स्टेशन चले गए। शुरू में गोड्डार्ड और उसके साथियों को कहीं से काई मदद न मिलने से उनकी आर्थिक हालत बिगड़ती गई। ऊपर से पुलिस के हस्तक्षेप से उन्हें बार-बार प्रताड़ित होना पड़ता था। कभी-कभी पुलिस तो कभी नाराज किसान उसके राकेट के माडलों को छीनकर ले जाते थे। किसान इसलिए परेशान थे क्योंकि वे राकेट उन्हीं के खेतों में आकर गिरते थे। जब अमेरिका को जलन हो रही थी और रूस ने की थी वादा खिलाफी
इन संकटों के बीच गोड्डार्ड को डेविड गग्जेहीम नाम के एक अमीर दानदाता से 50 हजार डॉलर की आर्थिक मदद मिल गई। इस आर्थिक सहायता से गोड्डार्ड ने न्यू मेक्सिको रेगिस्तान में एक राकेट स्टेशन की स्थापना कर ली। वहां गोड्डार्ड के नेतृत्व में उसके साथियों ने एक बड़े रोकट का निर्माण किया जो कि दागने पर आसमान में 2.5 किमी तक 800 किमी प्रति घण्टा की रफ्तार से गया।
वर्ष 1935 में गोड्डार्ड विश्व का पहला वैज्ञानिक बना जिसका लिक्विड प्रोपेल्ड राकेट समुद्र की सतह से हवा में 1200 किमी प्रति घण्टा की गति से गया। यह गति पहली बार आवाज से तेज थी। उसने इस तरह 200 राकेट के नूमूने निकाले जिनमें से एक मल्टी स्टेज राकेट भी था। यही आज के तीन स्तरीय बूस्टर राकेटों का भी आधार बना।
इंसान का एक कदम मानवता के लिये विशाल छलांग
अपोलो मिशन-11 के कमाण्डर नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने सबसे पहले 21 जुलाई 1969 को चांद पर कदम रखा था। लेकिन जुबान फिसलने से उसके ऐतिहासिक बयान का एक शब्द ही इतिहास की किताबों में गलत दर्ज हो गया। नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने कहा था कि ‘‘एक आदमी का एक छोटा सा कदम मानवजाति के लिए एक विशाल छलांग होगी।
दरअसल, उसका मंतव्य एक खास आदमी से नहीं था। उसका अभिप्राय था कि आदमी का एक छोटा सा कदम मानवता के लिए विशाल छलांग है या हो सकती है।
यूरी गगारिन पहले अंतरिक्ष यात्री
रूसी क्रांति के बाद कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा रूस की सत्ता हासिल करने की 40वीं वर्षगांठ के अवसर पर रूस ने पृथ्वी की परिक्रमा के लिए पहला अंतरिक्ष यान 4 अक्टूबर 1957 को प्रक्षेपित किया था। इस यान का नाम स्पुतनिक-1 था जिसका वजन मात्र 84 किलोग्राम था तथा वह मल्टी स्टेज राकेट से प्रक्षेपित किया गया था।
पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले इस अंतरिक्ष यान ने 28,000 किमी प्रति घण्टा की रफ्तार से अपनी यात्रा की, जो कि तब तक की किसी भी अंतरिक्ष यान की सबसे तेज गति थी। इस यान ने एक रेडियो ध्वनि विस्तारित की जो कि सारे विश्व में सुनी या पकड़ी गई।
स्पुतनिक-1 के बाद 12 अप्रैल 1961 को सोवियत संघ के यूरी गगारिन ने अपने कैपसूल यान वोस्टोक-1 से अन्तरिक्ष की यात्रा की। वह अंतरिक्ष में जाने वाले प्रथम मानव थे। अन्तरिक्ष की यात्रा करने के बाद गागरिन अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठित व्यक्ति बन चुके थे और उन्हें कई तरह के पदक और खिताबों से सम्मानित किया गया था।
धरती पर चांद के अति कीमती पत्थर
सन् 1969 से लेकर 1972 तक के अपोलो अभियानों में अमेरिका के कुल 12 अन्तरिक्ष यात्री चांद पर उतरे जो कि चांद से 382 किलोग्राम चट्टान या पत्थर और मिट्टी लेकर आए। इन अभियानों पर अमेरिका के कुल 40,000 मिलियन डॉलर खर्च हुए।
इस प्रकार देखा जाए तो चाॅंद से लाई गई सामग्री या मिट्टी-पत्थर की कीमत प्रति ग्राम 1 लाख डॉलर की पड़ी। ये पत्थर अपने वजन के सोने से हजारों गुना महंगे साबित हुए। इसके बदले में अमेरिकी अन्तरिक्ष यात्री चांद पर 6 लूनर लैंडर, 3 लूनर रोवर वाहन और वैज्ञानिक उपकरणों का कम से कम 50 टन कबाड़ छोड़ गए। इनमें खाली डब्बे और अन्य कबाड़ भी शामिल था। संभवतः यह इतिहास में अंतरिक्ष में सबसे अधिक कबाड़ था।
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