हिंदी भाषा का जन्म कहां हुआ था?
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हर भाषा में वर्तनी को लिखने का एक खास तरीका होता है। इन्हें लिखते समय गलतियां होने की संभावना बनी रहती है, बोलते समय भी। इनमें से कई त्रुटियां तो ऐसी होती हैं कि हमें सही शब्द गलत लगने लगता है और गलत शब्द सही। इन शब्दों पर ग़ौर कीजिए। सहस्त्रों, मानवीयकरण, इंद्रा, ईर्षा, एक्य या एक्यता, कालिदास, आद्र आदि। ये सभी गलत शब्द हैं। सहस्त्र है सहस्त्रों नहीं, मानवीकरण सही है, मानवीयकरण नहीं।
इंदिरा है इंद्रा नहीं, ईर्ष्या है ईर्षा नहीं, ऐक्य है एक्य या एक्यता नहीं, आर्द्र है आद्र नहीं। कालिदास गलत है कालीदास सही। अहिल्या नहीं अहल्या कहिए। अकांक्षा नहीं आकांक्षा, तिथी नहीं तिथि, उज्वल नहीं उज्जवल, उधम नहीं ऊधम, उपजाउ नहीं उपजाऊ, उपलक्ष नहीं उपलक्ष्य, उष्मा नहीं ऊष्मा, करिएगा नहीं कहिए, कीजिएगा बोलिए। कवियत्री नहीं चलेगा कवयित्री लिखें-बोलें। काराग्रह नहीं कारागृह। कूबत नहीं होती कूवत होती है।
गंठजोड़ नहीं गठजोड़, गैरसम्मानजनक नहीं असम्मानजनक कहिए, चिन्ह नहीं चिह्न (ह आधा है न नहीं), ज्योत्सना नहीं ज्योत्स्ना, ब्रम्ह नहीं ब्रह्म, वापिस नहीं वापस, वेषभूषा नहीं वेशभूषा, सदृश्य नहीं सदृश, अनाधिकार नहीं अनधिकार, अनेकों नहीं अनेक, पूज्यनीय नहीं पूजनीय। ऐसे बहुत उदाहरण मिल जाएंगे। वैसे इन्हें सही बोलने और लिखने की कोशिश करें तो बेहतर है, अनिवार्य नहीं। हमारी अपनी भाषा है थोड़ा इधर-उधर हो जाए तो क्या फर्क पड़ता है। वैसे बता दें ये हमारा व्यक्तिगत मत है एक सामान्य नागरिक की हैसियत से। हिंदी के प्रकांड और विद्वान लोगों का सोच अलग संभव है।
हिंदी भाषा का जन्म कहां हुआ था? कहा जाता है कि हिंदी भाषा का इतिहास लगभग एक हजार साल पुराना है। संस्कृत भारत की प्राचीन भाषा है, जिसे आर्य या देवभाषा भी कहा जाता है। यह भी कहा जाता है हिंदी का जन्म संस्कृत की कोख से ही हुआ है।
हिंदी दिवस कहां से आया और क्यों ? हिंदी दिवस हर साल 14 सितम्बर को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि 14 सितम्बर, 1949 को संविधान सभा ने यह निर्णय लिया था कि हिंदी केन्द्र की आधिकारिक भाषा होगी। भारत के अधिकांश भागों में हिंदी बोली जाती है इसलिए यह निर्णय लिया गया था। हिंदी के विस्तार के लिए 1953 से पूरे भारत में 14 सितम्बर को हर साल हिंदी दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया।
इससे पहले 1918 में ही हिंदी को राजभाषा बनाने का मुद्दा उठ चुका था। तब गांधी जी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन में यह कहते हुए इस मुद्दे को उठाया था कि हिंदी जनमानस की भाषा है इसलिए इसे राजभाषा बनाया जाए। भारतीय संविधान के भाग 17 के अनुच्छेद 343(1) में कहा गया है कि संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अंतरराष्ट्रीय होगा।
बात अंकों की निकली है तो एक दिलचस्प जानकारी शेयर करते चलें। आपने देखा होगा कि कुछ लोग अपनी टू व्हीलर और फोर व्हीलर गाडि़यों की नंबर प्लेट में हिंदी अंकों का प्रयोग करते हैं। यह मान्य नहीं है। चलते-चलते यह भी बताते चलें कि इण्डिया नाम कहां से आया ? इसकी उत्पत्ति इण्डस (सिंधु) शब्द से हुई है जो यूनानियों द्वारा चौथी सदी ईसा पूर्व से प्रचलन में है।
बहरहाल हिंदी के बारे में इतना ही कह सकते हैं, 'एकता की जान है, हिदी देश की शान है...'
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