शनिवार को सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ वट सावित्री का व्रत रखा। इस दौरान महिलाओं ने निर्जला उपवास रखते हुए बरगद के पेड़ की विधि-विधान से पूजा की और पेड़ में धागा बांधकर अपने सुहाग की दीर्घायु की प्रार्थना की। पूजा के अवसर पर कथा सुनकर महिलाओं ने मनोकामनाएं पूर्ण होने की प्रार्थना की।
वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। यह व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम, समर्पण और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस लाने के लिए कठोर तप, समर्पण और अटूट दृढ़ संकल्प का परिचय दिया था। इसी कथा के स्मरण में यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पतियों के दीर्घायु और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के लिए करती हैं। मान्यता है कि वट वृक्ष में ही सावित्री ने अपने पति के प्राणों की रक्षा की थी।
वट वृक्ष को भारतीय संस्कृति में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसे दीर्घायु, स्थिरता और जीवन शक्ति का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों प्रमुख देवताओं का वास होता है। यही कारण है कि सुहागिन महिलाएं इस दिन वट वृक्ष की पूजा करके अपने पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
वट सावित्री व्रत के दिन सुहागिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं। व्रत का संकल्प लेने के बाद, वे पूजा की थाली तैयार करती हैं जिसमें रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीप, फल, मिठाई, भीगा हुआ चना और कच्चा सूत शामिल होता है।