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हिंदुत्व पर चुनाव लड़ने वाले बताएं, अब तक राम मंदिर क्यों नहीं बनाः तोगड़िया

Thu, 07 Dec 2017 07:35 PM IST
विनोद अग्निहोत्री, अहमदाबाद 
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Vishwa Hindu Parishad
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राम मंदिर मुद्दे पर राहुल गांधी, कांग्रेस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के हमलों के बीच विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण भाई तोगड़िया ने कांग्रेस के साथ-साथ बिना नाम लिए भाजपा पर भी निशाना साधा है। तोगड़िया ने गुजरात में भाजपा के विकास के दावे पर भी सवाल उठाए हैं। 
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विहिप के शीर्ष नेता प्रवीण तोगड़िया ने पूछा है कि हिंदुत्व के नाम पर चुनाव लड़ने वाले बताएं कि अब तक राम मंदिर क्यों नहीं बना? साथ ही विहिप नेता ने यह भी पूछा कि गुजरात में किसानों की दुर्दशा, लाखों नौजवानों की बेरोजगारी, छोटे मझोले उद्योगों की बंदी और महंगी शिक्षा की समस्या कब और कैसे दूर होगी? उन्होंने राजनीतिक दलों से इन मुद्दों पर अपनी कार्ययोजना स्पष्ट करने की मांग की है। तोगड़िया ने कहा है कि व्यर्थ के आरोप-प्रत्यारोपों में न उलझकर राजनीतिक दलों को विकास के इस एजेंडे पर अपनी राय स्पष्ट करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात में राजनीतिक दल तय करें कि उन्हें चुनाव हिंदुत्व के मुद्दे पर लड़ना है या विकास के मुद्दे पर। 

विश्व हिंदू कार्यालय में अमर उजाला से विशेष बातचीत करते हुए विहिप के फायर ब्रांड शीर्ष नेता कहते हैं कि कभी तो विकास में हिंदुत्व की बात की जा रही है तो कभी हिंदुत्व में विकास का घालमेल करके  भ्रम उत्पन्न किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अगर हिंदुत्व पर चुनाव लड़ना है तो उसके मुद्दे तो स्पष्ट हैं। हिंदुत्व के मुद्दे पर चुनाव लड़ने वाले बताएं कि अब तक राम मंदिर क्यों नहीं बना? आगे राम मंदिर बनेगा क्या? उसमें राजनीतिक दलों का क्या योगदान होगा? गौ हत्या बंदी का राष्ट्रीय कानून अभी तक क्यों नहीं बना? आगे बनेगा क्या? कश्मीरी हिंदू पंडितों को 42 साल तक क्यों नहीं उनके घरों में वापस बसाया जा सका? बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों को अब तक देश से क्यों नहीं हटाया जा सका? अवैध विदेशी नागरिकों को हटाने की जिम्मेदारी सरकार की है। अब तक यह जिम्मेदारी क्यों नहीं पूरी की गई? समान नागरिक संहिता अब तक क्यों नहीं लागू की गई? कश्मीर में धारा 370 अभी तक क्यों नहीं हटाई गई? 
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गुजरात में हजारों हिंदू अभी भी जेल में हैं। कश्मीर में सेना पर पत्थर मारने वालों को तो हम छोड़ रहे हैं, लेकिन गुजरात के जो हिंदू 2002 के दंगों के कारण निर्दोष होने के बावजूद जेल में हैं, उनको क्यों नहीं छोड़ा जा रहा है? हिंदुत्व की चर्चा इन मुद्दों पर करनी होगी, लेकिन वह इस बात से संतुष्ट भी हैं कि इस बार गुजरात चुनाव में राजनीति का हिंदूकरण हो गया है। दोनों प्रमुख दलों में इस बात की होड़ है कि उनमें ज्यादा बड़ा हिंदू दल कौन है? तोगड़िया कहते हैं कि यह प्रक्रिया अभी और व्यापक होगी और अगले चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति का हिंदूकरण होगा। उन्होंने कहा कि गुजरात में कोई भी दल अब मुसलमानों की बात नहीं कर रहा है, जबकि पहले मुसलमानों के वोटों के लिए होड़ होती थी। एक तरह से अब उनकी प्रसांगिकता खत्म सी हो गई है। यही अखिल भारतीय स्तर पर भी होगा। तोगड़िया कहते हैं कि यह उनकी वैचारिक विजय है, जिसके लिये उन्होंने लाखों रुपए की कमाई वाले डॉक्टरी पेशे को छोड़कर विश्व हिंदू परिषद में पूर्णकालिक रूप से सक्रिय हुए। 
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लगभग 40 से 50 लाख युवा बेरोगार हैं

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प्रवीण तोगड़िया कहते हैं कि अगर विकास की चर्चा करनी है तो गुजरात में 20 लाख पंजीकृत बेरोजगार युवा हैं और गैर-पंजीकृत मिलाकर लगभग 40 से 50 लाख युवा बेरोगार हैं। मेरा कहना है कि इन 40 से 50 लाख बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने का एक्शन प्लान क्या है? भाषण नहीं, एक्शन प्लान सभी दल बताएं। 45 हजार छोटे उद्योग गुजरात में बंद पड़े हैं। बेरोजगारी का एक बड़ा कारण यह भी है। इन 45 हजार छोटे मझोले उद्योगों को फिर से चालू करने और रोजगार देने का एक्शन प्लान क्या है? किसानों को फसल का वाजिब दाम नहीं मिल रहा है। मैं स्वयं किसान हूं, हमें कपास का प्रति कुंतल चार हजार रुपए से ज्यादा नहीं मिल रहा है जबकि खर्च तो छह हजार रुपए प्रति कुंतल से भी ज्यादा है।

मूंगफली का दाम भी प्रति कुंतल 3500 से 3800 रु.से ज्यादा नहीं मिल रहा है जबकि उसका भी खर्च एक कुंतल का 5500 रुपए से ज्यादा है। यही हालत अरहर जिसे गुजराती में तूर दाल कहते हैं की है। मेरा कहना है कि गुजरात में किसानों को कर्जमुक्त करके उनकी सभी प्रकार की फसलों कपास मूंगफली, जीरो, अरहर आदि का दाम खर्च से डेढ़ गुना करने की योजना क्या है? बहुत बड़ी मात्रा में मछुआरों की सैकड़ों नावें पाकिस्तान के कब्जे में हैं, उन्हें कब छुड़वा कर लाओगे? गुजरात में शिक्षा महंगी हो गई है। मैं खुद 1975 में 300 रुपए की वार्षिक फीस भरकर एक गांव से आकर किसान का बेटा डॉक्टर बना। अब तो जिनके पास एक करोड़ रुपए फीस देने के लिए पैसे नहीं होंगे, वो डॉक्टर नहीं बन सकते। 

मेरा कहना है कि सस्ती और गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने का एक्शन प्लान क्या है? मैंने कुल मिलाकर विकास का एजेंडा भी परिभाषित किया है, इसलिए एक दूसरे पर आरोप लगाकर निरर्थक बातों पर चर्चा करके कभी हिंदुत्व कभी विकास, कभी विकास कभी हिंदुत्व में पड़ते हुए यह एजेंडा दिया है, जिसे दोनों दल स्वीकार करें। कम से कम विकास का एजेंडा तो स्वीकार ही कर सकते हैं। यह करके कब कैसे देंगे यानी रोजगार कब कैसे दे देंगे, किसानों को कर्ज मुक्त करके उनकी फसल का डेढ़ गुना दाम कब कैसे देंगे, शिक्षा कब और कैसे सस्ती व गुणवत्ता वाली होगी, यह सब समयबद्ध कार्यक्रम अगर बताएंगे तो मुझे लगेगा कि राजनीति ठीक दिशा में जा रही है। 
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