सरकार ने स्पष्ट किया है कि कबाड़ में जाने वाली गाड़ियों को रिसाइकिल किया जाएगा। धातु के अलावा रबड़, कांच, टायर जैसी वस्तुओं को अलग कर लिया जाएगा जिनका प्रयोग वाहनों में दोबारा हो सकेगा। हालांकि आंतरिक सुरक्षा, रक्षा, सेना आदि के काम में लगे वाहनों पर यह पॉलिसी लागू नहीं होगी।
एक अप्रैल से रोडवेज की 250 से ज्यादा बसें कबाड़ हो जाएंगी। दरअसल ये बसें 15 साल से ज्यादा पुरानी हैं और नई वाहन कबाड़ नीति के दायरे में आ रही हैं। इन बसों को नीलाम किया जाएगा। दरअसल, सरकार वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने पर जोर दे रही है। नई वाहन कबाड़ नीति इसी वर्ष एक अप्रैल से लागू होगी। इसके तहत प्रदेश में 15 साल पुराने व्यावसायिक वाहनों को कबाड़ में भेजने की तैयारी है।
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एक अप्रैल से ऐसे वाहनों का संचालन तत्काल रोक दिया जाएगा। उप्र रोडवेज में आठ हजार बसों का बेड़ा है। करीब तीन हजार बसें अनुबंधित हैं। अनुबंधित बसें तो इस दायरे में नहीं हैं, लेकिन रोडवेज की 250 से ज्यादा बसें इस पॉलिसी में आ रही हैं। ऐसी बसों को इस नीति के दायरे में लाया जाएगा। वहीं, सरकार ने सभी विभागों से कहा है कि वे अपने यहां ऐसे वाहनों की गणना कर रिपोर्ट भेजें। रोडवेज भी इसकी रिपोर्ट तैयार कर रहा है।
रिसाइकिल भी किया जाएगा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कबाड़ में जाने वाली गाड़ियों को रिसाइकिल किया जाएगा। धातु के अलावा रबड़, कांच, टायर जैसी वस्तुओं को अलग कर लिया जाएगा जिनका प्रयोग वाहनों में दोबारा हो सकेगा। हालांकि आंतरिक सुरक्षा, रक्षा, सेना आदि के काम में लगे वाहनों पर यह पॉलिसी लागू नहीं होगी। नई पॉलिसी में नई गाड़ी लेने पर छूट भी दी जाएगी। उप्र परिवहन निगम प्रवक्ता अजित सिंह का कहना है कि बसों की गणना की जा रही है। एक अप्रैल से इस नियम को पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा।
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ग्रामीण क्षेत्रों में आएगी दिक्कत
तय आयु पूरी कर चुकी बसें बंद होने का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्र के यातायात पर पड़ेगा। चूंकि पुरानी बसों में से अधिकतर को ग्रामीण रूटों पर ही चलाया जा रहा है। ऐसे में रोडवेज को इन मार्गों पर पहले इंतजाम करने होंगे। नई बसों को खरीदने की तैयारी एवं अनुबंध पर बसें लगाने के लिए इसी के चलते मशक्कत की जा रही है।