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श्री लक्षचंडी महायज्ञ आज से: 1743 ब्राह्मण और 16 आचार्य रोजाना करेंगे दुर्गा सप्तशती के एक लाख पाठ

Sat, 11 Feb 2023 02:51 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, शाहाबाद, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)

सार

दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय और 700 श्लोकों का उच्चारण करेंगे। 73 लाख मंत्रों से प्रतिदिन यज्ञ में आहुतियां दी जाएंगी। शुक्रवार को शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य व श्रीश्रीश्री स्वरूपानन्देंद्र सरस्वती पहुंचे। 
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श्री लक्षचंडी महायज्ञ से पहले ध्वजारोहण करते जगद्गुरु शंकराचार्य , गुमटी माता जी और जागो जी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हरियाणा के कुरुक्षेत्र के शाहाबाद क्षेत्र के गांव गुमटी में श्री लक्षचंडी महायज्ञ शनिवार से प्रधान यज्ञशाला, चंडी यज्ञशाला और रुद्र यज्ञशाला में प्रारंभ होगा। इन सभी यज्ञ शालाओं में 109 हवन कुंड और एक प्रधान हवनकुंड शामिल है। महायज्ञ में 15 दिनों तक दुर्गा सप्तशती के एक लाख पाठ 1743 ब्राह्मण और 16 आचार्य प्रतिदिन करेंगे। वे निरंतर दुर्गा सप्तशती के 13 अध्याय और 700 श्लोकों का उच्चारण करेंगे।  
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श्री लक्षचंडी महायज्ञ में दशमांश यानी दुर्गा सप्तशती के 73 लाख मंत्रों से प्रतिदिन यज्ञ में आहुतियां दी जाएंगी। इस प्रकार 15 दिनों में 11 करोड़ मंत्रों से आहुतियां यज्ञ कुंड में समर्पित होंगी। विश्व कल्याण के लिए होने वाला यह महायज्ञ श्री श्री 1008 गुमटी वाले माता जी के संकल्प अनुसार एक लाख सप्तशती होम व परायण (श्री लक्षचंडी महायज्ञ) श्री श्री मां भगवती को पूर्ण रूप से समर्पित होगा।

ध्वजारोहण और कलश स्थापना की, शंकराचार्य और ब्राह्मणों ने महायज्ञ को सफल करने का लिया संकल्प
शुक्रवार को शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य व श्रीश्रीश्री स्वरूपानन्देंद्र सरस्वती पहुंचे। उन्होंने सर्वप्रथम मंदिर में दर्शन किए और उसके बाद 40 एकड़ में बनी यज्ञशाला का अवलोकन किया। इसके साथ ही जयकारों की गूंज के बीच जगद्गुरू शंकराचार्य ने उत्तराधिकारी शंकराचार्य स्वमाननेंद्र की उपस्थिति के बीच ध्वजारोहण किया, जिसके बाद यहां पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे ब्राह्मणों ने कलश पूजा के साथ कलश स्थापना की और महायज्ञ के सफल होने की कामना की। इसके साथ ही पंडितों ने मंडप में प्रवेश कर लिया।
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महायज्ञ में स्थापित किए कलश में 21 तीर्थों, 11 नदियों व 11 शक्तिपीठों का जल
मंदिर के प्रमुख सेवादार कमल चुघ ने बताया कि महायज्ञ में स्थापित किए गए कलश में देश के 21 तीर्थों, 11 नदियों, 11 शक्तिपीठ और गंगा सागर समुद्र का जल शामिल है। उन्होंने बताया कि अयोध्या  से सरयू नदी का जल, कामाख्या से ब्रह्मपुत्र का जल, हिमाचल के सभी शक्तिपीठ ज्वाला जी, चिंतपुरनी, चामुण्डा देवी, नैना देवी और व्र्रजेश्वरी देवी जी से जल, भुवनेश्वर जगन्नाथ पूरी के मंदिर के कूप से जल, भुवनेश्वर जी से लिंगराज जी का जल, कटक चंडी शक्तिपीठ जल और मां वैष्णो देवी जी से जल लाने में उन्हें महीनों का समय लगा था।
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