बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में बड़ी सफलता मिली है। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के 108 नक्सली कैडरों ने समाज की मुख्यधारा में वापसी की है। इनमें 44 महिला नक्सली शामिल हैं, जिन पर 3.29 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
यह आत्मसमर्पण पुणे मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल के तहत हुआ। डीजीपी अरुण देव गौतम ने इसकी जानकारी दी। नक्सलियों ने पुलिस को आधुनिक हथियार, करोड़ों रुपये नकद और एक किलो सोना सुपुर्द किया। यह अब तक के इतिहास में पहली बार हुआ है। पुलिस ने 101 घातक हथियार बरामद किए, जिनमें एके-47, इंसास, एलएमजी और बीजीएल शामिल हैं।
नक्सलियों ने अपने हथियार छुपाने की जगहें भी पुलिस को दिखाईं। देश के नक्सल विरोधी अभियान में एक ही स्थल से 3.61 करोड़ रुपये नकद और 1.64 करोड़ रुपये मूल्य का एक किग्रा सोना बरामद हुआ। पिछले 26 महीनों में 2714 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर शांतिपूर्ण जीवन चुना है।
इस आत्मसमर्पण में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के कई प्रमुख कैडर शामिल थे। इनमें पश्चिम बस्तर डिवीजन के डीवीसीएम राहुल तेलाम, पण्डरु कोवासी और झितरु ओयाम थे। पूर्व बस्तर डिवीजन कमेटी के डीवीसीएम रामधर उर्फ बीरु भी शामिल थे। उत्तर बस्तर डिवीजन कमेटी के डीवीसीएम मल्लेश और एओबी के डीवीसीएम कोसा मण्डावी ने भी आत्मसमर्पण किया। पीएलजीए बटालियन नंबर एक के सीवाईपीसी कमांडर मुचाकी भी मुख्यधारा में लौटे हैं।
पुलिस ने नारायणपुर जिले से सर्वाधिक 49 हथियार बरामद किए। बस्तर से 24, सुकमा से 12, बीजापुर से नौ, दंतेवाड़ा से पांच तथा कांकेर से दो हथियार मिले। कुल 101 हथियार और अन्य डंप सामग्री रेंज मुख्यालय जगदलपुर में प्रदर्शित की गई। इस सामूहिक आत्मसमर्पण को नक्सल विरोधी अभियानों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह बस्तर में शांति स्थापना और विकास प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।