फायर ब्रिगेड में कार्यालय में खड़ी गाड़ियां।
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फसल कटाई के सीजन में हर साल आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, लेकिन फायर ब्रिगेड में कर्मचारियों की कमी के चलते बड़ी मात्रा में फसलें आग की भेंट चढ़ जाटी हैं। झज्जर फायर बिग्रेड कार्यालय में मात्र 13 कर्मचारियों के सहारे काम चलाया जा रहा है नियमानुसार कार्यालय में 90 कर्मचारी चाहिए, लेकिन मात्र 13 कर्मचारी ही दमकल केंद्र में काम कर रहे हैं। जबकि इस दमकल केंद्र के अंतर्गत 2 शहरों में 70 गांव आते हैं। इन गांवों में होने वाली आगजनी की घटनाओं पर काबू पाने के लिए गाड़ियां जाती हैं।
90 कर्मचारियों का काम तेरह के कंधे पर : झज्जर के फायर ब्रिगेड कार्यालय में आगजनी की घटनाओं पर काबू पाने के लिए 5 गाड़ियां हैं। नियम अनुसार एक गाड़ी पर एक शिफ्ट में 6 कर्मचारी चाहिए 3 शिफ्ट के हिसाब से पांचों गाड़ियों पर 90 कर्मचारियों की आवश्यकता है। लेकिन 90 कर्मचारियों का भार मात्र 13 कर्मचारियों के कंधों पर है और इनके भी अवकाश रद्द कर दिए गए हैं। मौके पर पहुंचते हुए लग जाता है समय : झज्जर मुख्यालय से आगजनी की घटना होने पर जिला के अंतिम छोर तक पहुंचते हुए गाड़ियों को समय लग जाता है और उस समय तक किसानों की फसलें जलकर राख हो चुकी होती हैं। फसलों के सीजन में मातनहेल, साल्वाहास व बेरी में भी फायर ब्रिगेड की एक गाड़ी मुहैया करा दी जाए तो आगजनी की घटनाओं में नुकसान कम होने की संभावनाएं हैं। झज्जर दमकल केंद्र के प्रभारी विजेंद्र डगर ने बताया कि कर्मचारियों की कमी को लेकर विभाग के मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी गई है। फिलहाल फसलों के सीजन में आगजनी की घटना नहीं हुई है।