शिवलिंग पर जल अर्पित करते श्रद्धालु
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सावन महीने के पहले सोमवार को मंदिरों में श्रद्घालुुओं की भीड़ उमड़ी। सुबह 4 बजे से ही मंदिरों में आरती शुरू हो गई थी। मोदाश्रम मंदिर में हवन यज्ञ से पूजा की शुरूआत की गई। कोविड 19 के चलते मंदिर में धूप, अगरबती, ज्योत जलाने पर रोक लगाई गई है। मंदिर में कहीं पर प्रसाद भी नहीं चढ़ाया जा सकता।
सावन महीने में शिवालयों में जलाभिषेक का विशेष महत्व है। सोमवार को जल चढ़ाने की महत्ता काफी बढ़ जाती है। मान्यता है कि इस दिन जल चढ़ाने से मनवांछित फल मिलता है। श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना के साथ जलाभिषेक करते हैं। इस बार सावन माह में पांच सोमवार हैं। तीन व्रत कृष्ण पक्ष और दो शुक्ल पक्ष में हैं। छह जुलाई से सावन शुरू हो गया है। पहले सोमवार को सुबह से ही श्रद्घालुुओं से ही भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। सुबह 4बजे से ही मंदिरों के कपाट खोल दिए गए थे।मंदिरों में ब्रह्म मुहूर्त से ही आरती -पूजन शुरू हो गया। श्रद्धालुओं को कोविड 19 के चलते खास निर्देश जारी किए गए थे। जिसमें श्रद्घालुुओं को अपने घर से ही लौटा लाना था। एक दूसरे के बर्तन को उपयोग करने की अनुमति नहीं दी गई थी। मंदिर में घंटियों पर कपड़ा बांधा गया है। प्रतिमाओं को छूने पर भी रोक लगाई गई थी। मंदिर परिसर में धूप, अगरबती, ज्योत नहीं जलाई जा सकी। प्रतिबंध होने के कारण श्रद्घालुुओं को केवल जल अर्पित कर ही संतोष करना पड़ा। मंदिर में प्रसाद, चरणामृत का वितरण भी नहीं किया गया।
मंदिर परिसर में सोशल डिस्टेंस का पालन किया गया। श्रद्घालुुओं को मंदिर में लगाए गए गोले की आकृति में रोकते हुए प्रवेश दिया गया। बिना मास्क वाले श्रद्घालुुओं को मंदिर में जाने की अनुमति नहीं दी गई। मंदिर के गेट पर ही साबुन रखा गया। यहां हाथ धोने के बाद ही अंदर जाने की अनुमति थी। समय समय पर मंदिर में सैनिटाइजर का छिड़काव भी कराया गया।