अंबाला कैंट। जुवैनाइल कोर्ट ने दो आपराधिक मामलों में दो नाबालिगों को सजा देते हुए मरीजों की सेवा करने के आदेश दिए थे। उन्हें कैंट सिविल अस्पताल भेजा गया था। लेकिन इनमें से एक नाबालिग सजा शुरू होने के पहले ही दिन फरार हो गया। इनकी सजा 12 सितंबर को शुरू होनी थी। सूचना मिलने के बाद शनिवार को कैंट के सिविल अस्पताल में जुवैनाइल जस्टिस बोर्ड के सदस्य डॉ. कुलदीप व हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य परमजीत सिंह बड़ौला कैंट सिविल अस्पताल पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि एक बच्चे को तीन महीने व दूसरे बच्चे को छह महीने की सजा सुनाई थी। सजा के तहत दोनों को कैंट सिविल अस्पताल में मरीजों की तीन व छह महीने तक सेवा करनी थी। इसी के चलते दोनों नाबालिगों को अंबाला कैंट सिविल अस्पताल में छोड़ा गया था। जिसमें से एक नाबालिग अस्पताल से ही बहाना बनाकर फरार हो गया। वे स्टाफ नर्स से बहाना बनाकर गया था और उसके बाद आज तक लौटकर ही नहीं आया। जबकि दूसरा नाबालिक बतौर सजा जेल में मरीजों की सेवा कर रहा था। आयोग के सदस्य परमजीत सिंह बडौला का कहना है कि उन्होंने कैंट अस्पताल को दौरा किया है। जिसमें चिकित्सकों ने बताया कि दो बच्चो में से एक बच्चा नियमित ड्यूटी पर है। जबकि दूसरा बच्चा पहले दिन ही बहाना बनाकर चला गया था। दोनों बच्चेे चोरी व झगड़े के मामले में बंदी थे और जुवैनाइल कोर्ट ने उन्हें तीन व छह महीने तक कैंट सिविल अस्पताल में रोजाना मरीजों की सेवा करने की सजा सुनाई थी। आयोग के सदस्य परमजीत व जुवैनाइल जस्टिस बोर्ड के सदस्य डॉ. कुलदीप ने कहा कि इस बारे में जुवैनाइल जस्टिस बोर्ड को फरार हुए बच्चे की सूचना देंगे, उसके बाद देखते हैं कि बोर्ड फरार हुए बच्चे के बारे में क्या फैसला लेता है। जुवैनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग बच्चों को सजा देने का ये सराहनीय तरीका निकाला है, लेकिन इस पर भी सख्ती होना बहुत जरूरी है। यदि सजा के बावजूद अस्पताल में बच्चा फरार हो जाए, तो ये गंभीर बात है।