बीजापुर में रहने वाले एक छह वर्षीय बच्चे को सोने के दौरान करैत साँप ने डस लिया। परिजनों को जब इस बात की जानकारी लगी तो उन्होंने बच्चे को बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल ले गए, जहाँ बच्चे की खराब स्थिति को देखते हुए मेकाज रेफर किया गया।
बीजापुर में एक दर्दनाक हादसे के बाद छह साल के मासूम को डॉक्टरों की मेहनत और समय पर मिले इलाज से नई जिंदगी मिली। बच्चा रात में सो रहा था, इसी दौरान जहरीले करैत सांप ने उसे डस लिया। सांप के जहर का असर इतना गंभीर था कि बच्चा कोमा में चला गया और उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
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परिजन आनन-फानन में बच्चे को जिला अस्पताल बीजापुर लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए जगदलपुर स्थित शहीद महेंद्र कर्मा स्मृति चिकित्सालय (मेकाज), डिमरापाल रेफर कर दिया। 22 अगस्त की शाम जब बच्चा मेकाज पहुंचा, तब वह ठीक से सांस तक नहीं ले पा रहा था।
जांच में पता चला कि बच्चे को न्यूरोटॉक्सिक करैत सांप ने डसा था। जहरीले जहर के कारण वह कोमा में था। इसके साथ ही उसे ब्रेन मलेरिया, निमोनिया, फेफड़ों में गंभीर संक्रमण और खून की अत्यधिक कमी जैसी कई गंभीर परेशानियां भी थीं।
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मेकाज पहुंचते ही शिशु रोग विभाग की PICU टीम ने बिना समय गंवाए इलाज शुरू किया। बच्चे को तत्काल वेंटिलेटर पर रखा गया। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने लगातार तीन दिनों तक उसकी हालत पर नजर बनाए रखी। इलाज के दौरान उसे दो बार रक्त चढ़ाया गया और शॉक व मलेरिया की स्थिति में भी उपचार जारी रखा गया।
लगातार उपचार का असर आखिरकार दिखाई दिया। जिस मासूम की हालत अस्पताल पहुंचने के समय बेहद नाजुक थी, वह अब खतरे से पूरी तरह बाहर है। मेकाज अधीक्षक डॉ. अनुरूप कुमार साहू के नेतृत्व में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और वार्ड बॉय की टीम की दिन-रात की मेहनत से बच्चे की जान बचाई जा सकी। परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है।