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बीजापुर: विधायक विक्रम मंडावी बोले- कोरंडम खदान स्वीकृति अवैध, PESA कानून का उल्लंघन

Sat, 14 Feb 2026 12:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, बीजापुर

सार

बीजापुर। जिला खनिज अधिकारी बीजापुर  द्वारा जारी हालिया बयान पर गंभीर आपत्ति दर्ज करते हुए बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने जिला खनिज अधिकारी द्वारा तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है,
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बीजापुर न्यूज
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विस्तार
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बीजापुर विधायक विक्रम मंडावी ने जिला खनिज अधिकारी के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि भाजपा सरकार और जिला प्रशासन आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की उपेक्षा कर रहे हैं। उनका आरोप है कि भाजपा बस्तर के खनिज संसाधनों को रसूखदारों को सौंपने की साजिश रच रही है और इसे कानूनी जामा पहनाने के लिए झूठे तर्क गढ़ रही है।

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PESA कानून का उल्लंघन
विधायक मंडावी ने स्पष्ट किया कि बीजापुर पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत एक अनुसूचित क्षेत्र है, जहाँ PESA एक्ट 1996 लागू है। इस कानून के अनुसार, अनुसूचित क्षेत्रों में गौण खनिजों जैसे कोरंडम के पट्टे के लिए ग्राम सभा की पूर्व अनुशंसा अनिवार्य है। प्रशासन द्वारा 25 मार्च 2011 के 14 साल पुराने प्रस्ताव के आधार पर अनापत्ति लेने का दावा किया जा रहा है, जो वर्तमान ग्राम सभा की सहमति के बिना PESA के छत्तीसगढ़ नियमों का घोर उल्लंघन है। यह आदिवासियों की आवाज दबाने की कोशिश है।

पर्यावरण नियमों की अनदेखी
विभाग द्वारा 5.0 हेक्टेयर से कम क्षेत्र होने पर जनसुनवाई को अनिवार्य न मानने के तर्क को विधायक ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि EIA अधिसूचना 2006 के तहत गौण खनिजों की सभी खदानों के लिए पर्यावरण स्वीकृति (EC) अनिवार्य है। PESA वाले क्षेत्रों में जनसुनवाई और ग्राम सभा की सहमति पर्यावरण प्रक्रिया का अभिन्न अंग है। 3.70 हेक्टेयर की खदान से भी आदिवासी बहुल इलाके में जंगल, पानी और आजीविका पर गहरा असर पड़ेगा, जो स्थानीय लोगों की सुनवाई के बिना अवैध है।
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तत्काल रद्दीकरण की मांग
विधायक मंडावी ने भाजपा सरकार पर छोटे-छोटे टुकड़ों में खदानें देकर पर्यावरण नियमों को चकमा देने और आदिवासियों को विस्थापित करने का आरोप लगाया। उन्होंने पर्यावरण स्वीकृति को तत्काल रद्द करने, ग्राम कुचनूर की ग्राम सभा की बैठक बुलाकर स्पष्ट सहमति लेने और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से दोबारा शुरू करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वे आदिवासियों के साथ मिलकर आंदोलन करेंगे।

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