देश भर में पांच सौ और हजार रुपये के नोट बंद करने के फैसले के बाद से छत्तीसगढ़ में एंटी करप्शन ब्यूरो के अधिकारी परेशान हैं। भ्रष्टाचार के मामलों में पिछले कई सालों में जब्त की गई वह रकम ब्यूरो के लिये परेशानी का सबब थी, जिसका अधिकांश हिस्सा पांच सौ और हजार रुपये की शक्ल में था। ब्यूरो ने ऐसी 12 करोड़ रुपये से अधिक की रकम एक बैंक खाता खुलवा कर जमा करा दी है। लेकिन रिश्वत के मामलों में जब्त लाखों रुपये की रकम अभी भी ब्यूरो के पास ही है।
असल में एंटी करप्शन ब्यूरो रिश्वतखोरी के मामलों में कार्रवाई के समय जिन नोटों को जब्त करता है, वही नोट सबूत के तौर पर अदालत में पेश किये जाते हैं।
पिछले कई सालों में ऐसे लाखों रुपये ब्यूरो की ओर से जब्त किये गये हैं और किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा रिश्वत लिये जाने की बात को अदालत में साबित करने के लिये अगले कई सालों तक सबूत के लिये इन नोटों को अपने पास रखना ब्यूरो की मजबूरी है।
रायपुर में एंटी करप्शन ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार खिलाड़ी कहते हैं, "रिश्वत के मामले में किसी शासकीय सेवक को ट्रैप करने के लिये जिस रकम का उपयोग किया जाता है, उसके हरेक नोट का नंबर नोट किया जाता है। जब रिश्वत लेने वाले को पकड़ा जाता है, उसके बाद गवाहों के सामने उन नोटों का मिलान कर उसे सीलबंद कर कोषागार में जमा कर दिया जाता है।" जब मामले में चालान पेश किया जाता है, तब अभियोग पत्र के साथ इन नोटों को अदालत में पेश किया जाता है।