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CG News: नवा रायपुर में जनजातीय संग्रहालय बनकर तैयार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 14 मई को करेंगे लोकार्पण

Tue, 13 May 2025 12:09 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर

सार

छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर प्रदेश के जनजातीय शैली, संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित संग्रहालय लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हो गया है।
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय - फोटो : अमर उजाला
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छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर प्रदेश के जनजातीय शैली, संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित संग्रहालय लगभग 9 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हो गया है। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 14 मई को इस संग्रहालय का लोकार्पण करेंगे। आदिम जाति विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि संग्रहालय में डिजीटल और एआई तकनीक के माध्यम से जनजातीय संस्कृति का भी प्रदर्शन किया गया हैं। क्यूआर कोड स्कैन करते ही सम्बंधित झांकी की सम्पूर्ण जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध हो जाएगी।
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अधिकारियों ने बताया कि शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री के हाथों नवनियुक्त छात्रावास अधीक्षक को नियुक्ति प्रमाण-पत्र भी प्रदान करने साथ ही प्रयास आवासीय विद्यालय के जेईई मेंस 2025 में क्वालिफाई करने वाले छात्रों का सम्मान भी किया जाएगा। जनजातीय संग्रहालय में कुल 14 गैलरियां हैं, जिनमें जनजातीय जीवनशैली के सभी पहलुओं का बहुत ही खूबसूरत ढ़ंग से जीवंत प्रदर्शन किया गया है। इनमें जनजातियों के भौगोलिक विवरण, तीज-त्यौहार, पर्व-महोत्सव तथा विशिष्ट संस्कृति, आवास एवं घरेलू उपकरण, शिकार उपकरण, वस्त्र (परिधान) एवं आभूषण, कृषि तकनीक एवं उपकरणों, जनजातीय नृत्य, जनजातीय वाद्ययंत्रों, आग जलाने, लौह निर्माण, रस्सी निर्माण, फसल मिंजाई (पौधांे से बीज अलग करना), कत्था निर्माण, चिवड़ा-लाई निर्माण, मंद आसवन, अन्न कुटाई व पिसाई, तेल प्रसंस्करण हेतु उपयोग में लाने जाने वाले उपकरणो व परंपरागत तकनीकों, को दर्शाया गया हैं। 

वहीं सांस्कृतिक विरासत के अंतर्गत अबुझमाड़िया में गोटुल, भुंजिया जनजाति में लाल बंगला इत्यादि, जनजातीय में परम्परागत कला कौशल जैसे बांसकला, काष्ठकला, चित्रकारी, गोदनाकला, शिल्पकला आदि का एवं अंतिम गैलरी में विषेष रूप से कमजोर जनजाति समूह यथा अबूझमाड़िया, बैगा, कमार, पहाड़ी कोरवा, बिरहोर एवं राज्य शासन द्वारा मान्य भुंजिया एवं पण्डो के विशेषीकृत पहलुओं का प्रदर्शन किया गया है।
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