कोंडागांव जिला मुख्यालय में बीते 15 दिनों से हरे-भरे पेड़ों का कत्लेआम बेरोकटोक जारी है। दिन के उजाले में, चाय की चुस्कियों और नेताओं के भाषणों के बीच, पेड़ धराशायी हो रहे हैं। ट्रैक्टरों में लकड़ियां लादकर मिलों और बाजारों की ओर रवाना हो रही हैं, लेकिन वन विभाग गहरी ‘योग-निद्रा’ में लीन है।
NH-30 पर बने फॉरेस्ट चेक पोस्ट, जो जंगल की रक्षा के लिए बनाए गए थे, वहां से पेड़ आराम से निकल रही हैं। चेक पोस्ट के जवान या तो लकड़ी की महक में खोए हैं या अपनी जिम्मेदारी से अनजान। साफ है, ये चेक पोस्ट ‘फॉरेस्ट संरक्षण’ के लिए नहीं, बल्कि ‘फॉर्मेलिटी कलेक्शन’ के लिए खड़े हैं!
जब कांग्रेसियों को खबर लगी कि संयुक्त कलेक्टर चित्रकांत चार्ली ठाकुर के घर के सामने भी पेड़ कट रहे हैं, वे मौके पर पहुंचे। वहां उन्हें काटे गए छह पेड़ मिले और अधिकारी ‘स्लीप मोड’ में मिले। एसडीएम ने बताया कि आम जनता को नुकसान पहुंचा रहे पेड़ों को चिन्हांकित कर काटा जा रहा है, लेकिन फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर बी रामाराव कुछ और ही राग अलापते मिले। उन्होंने कहा कि कटाई का आदेश तो मिला, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हुआ।
जांच हुई, जवाब गोलमोल
रामाराव मौके पर पहुंचे तो पेड़ कटे मिले, लेकिन आदेश का नामोनिशान नहीं। आरा मशीन, रस्सी, ट्रैक्टर और लकड़ियां जब्त की गईं। फिर वही रटी-रटाई स्क्रिप्ट, 'हमें लगा नगरपालिका काट रही होगी।' यानी एक अनुमान के भरोसे वन विभाग 15 दिन तक आंखें मूंदे बैठा रहा।