छत्तीसगढ़ के तीन प्रमुख निजी चिकित्सा महाविद्यालयों द्वारा एमबीबीएस के विद्यार्थियों से छात्रावास, मेस और बस परिवहन के नाम पर की गई भारी वसूली के मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति ने ऐतिहासिक व कड़ा निर्णय सुनाया है। शासन ने आदेश जारी कर तीनों निजी चिकित्सा महाविद्यालयों को सत्र 2022-23 से 2024-25 के दौरान विद्यार्थियों से अधिक वसूली गई लाखों रुपये की अतिरिक्त फीस सीधे उनके बैंक खातों में एक महीने के भीतर वापस करने का आदेश दिया है।
साथ ही, शासन ने तीनों महाविद्यालयों पर 10-10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि एक महीने के भीतर विद्यार्थियों को राशि नहीं लौटाई गई, तो कॉलेजों को 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। इसके अलावा जुर्माना न चुकाने की स्थिति में संस्थानों की मान्यता रद्द करने की सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त ने तीनों महाविद्यालयों के डीन को तत्काल पालन प्रतिवेदन पेश करने का नोटिस जारी किया है।
नियमों की अनदेखी और अनुचित वसूली
प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और उच्च न्यायालय के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि छात्रावास, मेस और बस परिवहन की सुविधा विद्यार्थियों के लिए पूरी तरह से वैकल्पिक होनी चाहिए। इसके साथ ही यह पूरी व्यवस्था बिना लाभ और बिना हानि के सिद्धांत पर चलनी चाहिए। इसके बावजूद तीनों महाविद्यालयों ने इन सुविधाओं को सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य बना दिया था।
हैरानी की बात यह रही कि कई संस्थानों में छात्रावास कॉलेज परिसर के भीतर होने के बावजूद विद्यार्थियों से बस परिवहन के नाम पर प्रति वर्ष 1 लाख रुपये से लेकर 2.50 लाख रुपये तक वसूले गए। समिति की जांच में वास्तविक परिवहन खर्च महज 4,600 रुपये से 13,700 रुपये प्रति छात्र सालाना पाया गया। समिति ने इस अनुचित वसूली को छत्तीसगढ़ निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्था अधिनियम, 2008 के तहत अवैध केपिटेशन फीस करार दिया है।
जांच में उजागर हुई वित्तीय गड़बड़ियां
जांच के दौरान समिति के वित्त सदस्य ने पाया कि महाविद्यालय प्रशासन वास्तविक खर्चों के स्पष्ट दस्तावेज और अलग बैलेंस शीट पेश नहीं कर सका। एक महाविद्यालय ने पूरे वर्ष मेस में सब्जी, आलू और प्याज का एक समान मासिक खर्च 2.50 लाख रुपये दर्शा दिया, जबकि गर्मियों की छुट्टियों में मेस पूरी तरह से बंद रहता है।
इसके अलावा कर्मचारियों का कोई पृथक वेतन रिकॉर्ड भी नहीं मिला। अस्पताल और कॉलेज का संयुक्त बिजली बिल छात्रावास के विद्यार्थियों के सिर मढ़ दिया गया था। जांच में इस बात का खुलासा हुआ कि विद्यार्थियों से प्रति छात्र 4.58 लाख रुपये तक की भारी अतिरिक्त राशि वसूली जा रही थी।
विद्यार्थियों तथा अभिभावकों को मिली राहत
चिकित्सा शिक्षा विभाग के इस कड़े कदम से प्रदेश के मेडिकल विद्यार्थियों और उनके पालकों ने बड़ी राहत महसूस की है। अब तक शासन द्वारा निर्धारित 7.45 लाख रुपये से 7.99 लाख रुपये की ट्यूशन फीस के अलावा छात्रावास और बस परिवहन के नाम पर 5 लाख रुपये से अधिक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ थोप दिया जाता था।
शासन के इस नए आदेश के बाद अब किसी भी छात्र को छात्रावास या बस सेवा का लाभ लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा। यदि कोई संस्थान फिर से इस तरह की अतिरिक्त वसूली करता है, तो उस पर सीधे मान्यता रद्द होने की तलवार लटकेगी। शासन की इस कार्रवाई से निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी पर लगाम लगेगी।