घात लगाकर किए गए नक्सली हमले के दौरान सीआरपीएफ जवानों ने भी नक्सलियों को करारा जवाब दिया था। नक्सली हमले में घायल जवान शेर मोहम्मद खान ने मंगलवार को बताया कि नक्सलियों की संख्या 300 के करीब थी और वे एके 47 जैसे हथियारों से भी लैस थे।
खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से अनुरोध किया कि वे जवानों को अफस्पा का अधिकार दें, जिससे वे इस अशांत क्षेत्र में नक्सलियों से बेहतर तरीके से निपट सकें। गौरतलब है कि इस विवादित एक्ट के तहत जवानों को देखते ही गोली मारने का अधिकार है।
एक अन्य जवान ने अपना नाम उजागर न करने की शर्त पर घायल जवान ने बताया कि कुछ नक्सली रॉकेट लांचर से लैस थे। छत्तीसगढ़ के सुकमा में सोमवार को हुए नक्सली हमले को दौरान पहले ग्रामीण आए और फिर उनके बाद काले पोशाक पहने हुए नक्सली।
नक्सली हमले में घायल हुए इन दोनों जवानों का रायपुर के अस्पताल में इलाज चल रहा है। जवान ने कहा कि ग्रामीण हथियारों से लैस नहीं थे। इस वजह से इस बात का आभास नहीं हुआ कि वे नक्सलियों के साथ हैं।
ऐसे में उनके ऊपर फायरिंग कैसे की जा सकती थी। उसने बताया कि जवानों की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई में कई नक्सली भी मारे गए। सुकमा दक्षिणी बस्तर में स्थित है, जो दशकों से नक्सलियों का गढ़ बना हुआ है। छत्तीसगढ़ में अप्रैल 2010 से अब तक हुए छह बड़े हमलों में करीब 200 जवान शहीद हो चुके हैं।